UK: कश्मीर पर प्रस्ताव लेबर पार्टी को पड़ा महंगा?

नई दिल्ली
में की करारी हार हुई और के नेतृत्व में ने शानदार फतह हासिल की। इस चुनावी नतीजे को लेकर कुछ ब्रिटिश इंडियन का कहना है कि कश्मीर मुद्दे पर लेबर रेजॉलूशन और उनके समर्थन में आए प्रतिबंधित संगठन (जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट) के कारण भारतीय वोटर लेबर पार्टी से चिढ़ गए और उन्होंने कंजरवेटिव को वोट किया।

लेबर के खिलाफ चलाया कैम्पेन
यूके में बीजेपी के समर्थक कुलदीप शेखावत ने कहा कि उनकी टीम और ब्रिटिश हिंदू ऐंड इंडियन वोट्स मैटर (BHIVM) ने मिलकर कंजरवेटिव को सपॉर्ट करने का फैसला किया। उनके समर्थन में कैम्पेन भी चलाया गया। करीब 68 ऐसे सीट थे जहां इन लोगों ने भारतीयों को कंजरवेटिव उम्मीदवारों को सपॉर्ट करने के लिए प्रेरित किया जिससे लेबर उम्मीदवारों को नुकसान हुआ।

सीट में लेबर को कोई नुकसान नहीं
हालांकि टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में कुछ और ही तस्वीर नजर आ रही है। 2011 जनगणना के मुताबिक, यूके में करीब 30 ऐसे संसदीय क्षेत्र हैं जहां करीब 25 फीसदी आबादी एशियन हैं। इन 30 सीटों में से लेबर ने 29 सीटों पर जीत दर्ज की है। 2017 में भी लेबर पार्टी ने इन 30 में 29 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वैसे लेबर के वोट शेयर में काफी गिरावट आई है। 2017 में इन सीटों पर पार्टी को 67.60 फीसदी वोट मिले थे जो इस बार घटकर 61.20 फीसदी पर पहुंच गया।

कुल 15 भारतवंशी सांसद चुनकर आए
कुल 650 सीटों में से कंजरवेटिव ने 365 सीटों पर जीत हासिल की। इस बार रेकॉर्ड 15 भारतवंशी सांसद चुनकर आए हैं। कुछ नए चेहरों के पदार्पण के साथ ही 12 सांसदों ने अपनी-अपनी सीटें बरकरार रखीं। कंजरवेटिव पार्टी के लिए गगन मोहिंद्रा और क्लेयर कोटिन्हो तथा लेबर पार्टी के नवेंद्रु मिश्रा पहली बार सांसद बने। गोवा मूल की कोटिन्हो ने 35,624 मतों के साथ सुर्रे ईस्ट सीट पर जीत दर्ज की। महिंद्रा ने हर्टफोर्डशायर साउथ वेस्ट सीट पर जीत दर्ज की।

Source: International

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