NE में टेक ऑफ से पहले केंद्र की 'उड़ान' क्रैश!

कंकन कलिता, गुवाहाटी
दो साल पहले केंद्र सरकार ने एक योजना शुरू की थी नाम था ‘उड़े देश का आम नागरिक’ या संक्षेप में ‘उड़ान’। इसका मकसद था देश के आम नागरिकों को कम दरों पर हवाई सुविधा उपलब्‍ध कराना। लेकिन सरकार की यह योजना (उत्‍तर पूर्व) के राज्‍यों में उड़ान भर ही नहीं पाई, जबकि इस क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक स्थिति को देखते हुए सबसे ज्‍यादा यहीं इस योजना की उपयोगिता थी।

साल 2018 में नॉर्थ ईस्‍ट के अंदरूनी इलाकों को कोलकाता और गुवाहाटी जैसे प्रमुख केंद्रों को जोड़ने वाली 13 फ्लाइटें शुरू हुई थीं। मौजूदा समय में इनमें से केवल दो ही काम कर रही हैं। साथ ही उड़ान के अंतरराष्‍ट्रीय संस्‍करण के तौर पर गुवाहाटी और ढाका के बीच 1 जुलाई को लॉन्‍च हुई फ्लाइट भी होल्‍ड पर है।

केवल दो रूटों पर ही हवाई सेवा
उड़ान के तहत इस समय दो ही रूट- शिलॉन्‍ग से कोलकाता और जोरहाट से कोलकाता पर हवाई सेवा चल रही है। उड़ान को कार्यरूप देने के लिए जरूरी सुविधाओं का विकास करने की जिम्‍मेदारी (एएआई) को सौंपी गई थी लेकिन वह भी यह देखकर हैरान है कि अधिकांश रूटों से ‘महत्‍वाकांक्षी’ एयर लाइन कंपनियां पीछे हट गईं हैं।

‘इन क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं’
एएआई के रीजनल एग्जिक्युटिव डायरेक्‍टर संजीव जिंदल कहते हैं, ‘जिन रूट पर उड़ान के तहत एयरलाइंस ने अपने ऑपरेशंस बंद कर दिए वहां स्‍थापित एयर लाइंस कंपनियों को मौका देना चाहिए ताकि वे नॉर्थ ईस्‍ट में हवाई संचालन बनाए रखें। उन्‍हें हवाई यातायात को केवल व्‍यावसायिक नजरिए से देखने की जगह एक सामाजिक क्षेत्र के रूप में देखना चाहिए जहां क्षेत्र के संपूर्ण विकास के लिए संचार सुविधाओं को बेहतर किया जाना है और जहां वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं।’

जिंदल कहते हैं कि देश में दूसरी जगह घरेलू एयर रूट पर 98 प्रतिशत सीटें भरी रहती हैं लेकिन नॉर्थ ईस्‍ट में ऐसा नहीं है।

Source: National

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