
2 जजों की बेंच ने केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण
केंद्र सरकार ने कोर्ट के सामने दलील दी कि शॉर्ट सर्विस कमिशन और की ट्रेनिंग प्रक्रिया और दूसरे तकनीकी पक्षों में बहुत फर्क है। इस जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस अजय रस्तोगी की बेंच ने कहा, ‘आप चाहते हैं कि हम अपना फैसला सुनाएं तो हम ऐसा करेंगे। यह हमारे जरूरी है कि हम प्रशासन से पूछें कि स्थायी कमिशन की सुविधा मौजूदा शॉर्ट सर्विस कमिशन में काम करनेवाली महिलाओं को क्यों नहीं दी जा रही है।’
स्थायी जॉब में एयरफोर्स और नौसेना में कोई भेदभाव नहीं
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि स्थायी कमिशन की व्यवस्था सिर्फ थल सेना में महिलाओं के लिए है। केंद्र ने कहा कि एयरफोर्स और नेवी में पहले से ही महिला और पुरुष के आधार पर नीतियों में कोई भेदभाव नहीं है। केंद्र की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया, ‘एक बार जब कोई महिला अथवा पुरुष और नौसेना की शॉर्ट सर्विस कमिशन में शामिल होते हैं तो वह 14 साल के लिए सर्विस में रहते हैं। जेंडर के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता है।’
पीएम मोदी ने लाल किले से किया था ऐलान
बता दें कि पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में का ऐलान किया था। अक्टूबर में सेना की ओर से घोषणा की गई थी कि महिलाओं के लिए स्थायी कमिशन में निसुक्ति 2020 से शुरू होगी। हालांकि, सेना की ओर से स्पष्ट किया गया था कि कॉम्बैट ब्रांच में महिलाओं की नियुक्ति नहीं होगी।
Source: National

