
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संस्कृत प्रफेसर के खिलाफ चल रहे विरोध से पिछले 12 दिनों से पढ़ाई पूरी तरह ठप है। संकाय के साहित्य विभाग में मुस्लिम प्रफेसर फिरोज खान की नियुक्त मामले पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की। प्रफेसर ने छात्रों से सुनिश्चित किया कि मुस्लिम प्रफेसर की नियुक्ति बीएचयू ऐक्ट और सेंट्रल यूजीसी गाइडलाइंस के तहत हुई है। उन्होंने छात्रों से प्रदर्शन खत्म कने की भी अपील की।
सूत्रों के अनुसार, बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में पिछले 12 दिनों से पठन-पाठन पूरी तरह ठप है और छात्र धरने पर बैठे हुए हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच कई चरणों की बातचीत असफल हो चुकी है। मामला कब खत्म होगा, इस पर संशय बरकरार है। धरने पर बैठे छात्र ढोल-मजीरे के साथ रघुपति राघव राजा राम का भजन कर रहे हैं।
भजन के बीच-बीच में वे वीसी के खिलाफ नारेबाजी भी कर रहे हैं। धरने की अगुआई कर रहे पीएचडी स्टूडेंट चक्रपाणि ओझा के मुताबिक, ‘यह विरोध फिरोज खान (बीएचयू के प्रफेसर) का नहीं, बल्कि धर्म विज्ञान फैकल्टी में एक गैर हिंदू की नियुक्ति का है। अगर यही नियुक्ति विश्वविद्यालय के किसी अन्य फैकल्टी में संस्कृत अध्यापक के रूप में होती तो विरोध नहीं होता।’
संस्कृत से मैंने जेआरएफ किया- फिरोज खानचक्रपाणि ने आगे कहा, ‘यह समझने की जरूरत है कि संस्कृत विद्या कोई भी किसी भी धर्म का व्यक्ति पढ़ और पढ़ा सकता है, लेकिन धर्म विज्ञान की बात जब कोई दूसरे धर्म का व्यक्ति करे तो विश्वसनीयता नहीं रह जाती।’ इस बीच, सहायक प्रफेसर फिरोज खान का कहना है, ‘मेरे पिता रमजान खान ने संस्कृत में शास्त्री की उपाधि ली है। उन्हीं की प्रेरणा से मैंने संस्कृत का अध्ययन शुरू किया। मैंने दूसरी कक्षा से संस्कृत की शिक्षा लेनी शुरू की। संस्कृत से मैंने जेआरएफ किया, लेकिन कभी भी मुस्लिम होने के नाते कोई परेशानी नहीं हुई। मगर नियुक्ति को लेकर चल रहे आंदोलन से मैं हतोत्साहित हूं।’
नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं छात्र-अध्यापक
यूनिवर्सिटी ने नियुक्ति प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताते हुए सहायक प्रफेसर पद पर फिरोज खान की नियुक्ति को सही ठहराया है। कुलपति राकेश भटनागर ने कहा, ‘विश्वविद्यालय धर्म, जाति, संप्रदाय, लिंग आदि के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण के लिए सभी को अध्ययन और अध्यापन के समान अवसर उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है।’ संस्कृत विभाग के प्रफेसर राम नारायण दुबे ने कहा, ‘यह बात गलत है कि अध्यापक भी उनके (प्रदर्शनकारी छात्र) साथ हैं। छात्र नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। कोई भी नियुक्ति यूजीसी के गाइडलाइन के अनुसार ही हुई होगी।’
Source: National

