मोदी सरकार के आरसीईपी समझौते का होगा विरोध, सड़क पर उतरेंगे यूपी के किसान

प्रेम देव शर्मा, मेरठ
केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागेदारी () समझौते को लेकर वेस्ट यूपी के किसानों के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है। समझौते के खिलाफ किसानों ने गुरुवार को रोष प्रदर्शन का ऐलान किया है। यूपी के अलावा हरियाणा और कई अन्य राज्यों के किसान भी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार के किसान विरोधी फैसलों के खिलाफ 24 अक्टूबर को वेस्ट यूपी के जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। टिकैत ने कहा कि सरकार किसान विरोधी नीतियों को लागू कर हमें बर्बाद करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने दूध को लेकर विदेशी कंपनियों से आर्थिक समझौता किया है, जिससे यहां के किसानों को नुकसान होगा।

दरअसल आरसीईपी के तहत मुक्त व्यापार करार में डेयरी उत्पाद को शामिल करने के प्रस्ताव है, जिसका किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर आरसीईपी लागू हो गया और बाहर से दूध का आयात किया गया तो दूध उत्पादन के काम में लगे किसान पूरी तरह से तबाह हो जाएंगे। देश के बाजार पर विदेशियों का कब्जा हो जाएगा और भारत के किसानों को इनके उत्पाद का जो मूल्य मिल रहा है, उसमें गिरावट आ जाएगी। बीकेयू का कहना है कि भारत में ज्यादातर किसानों के पास 2 से 4 गायें हैं, जिनके दूध से उनका परिवार चलता है।

किसानों को आर्थिक स्थिति प्रभावित होने का डर
वहीं, दूसरी ओर न्यूजीलैंड के किसानों के पास 1000 की संख्या में गायें हैं। इस तरह तो देश के किसान बर्बाद ही हो जाएंगे। इस समझौते में शामिल न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के किसानों के पास दूध का उत्पादन खपत से बहुत ज्यादा है। वो जैसे ही अपने डेयरी उत्पाद को भारतीय बाजार में पेश करेंगे वैसे ही देश के दूध उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी।

डेयरी और कृषि को बाहर रखने की मांग
अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के संयोजक वीएम सिंह का कहना है कि खेती-किसानी पहले ही किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है, ऊपर से भारत सरकार आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, चीन और जापान समेत 16 देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता कर रही है। देशभर के किसान संगठनों ने सरकार से डेयरी और कृषि को इस समझौते से बाहर रखने की मांग की है। उन्होंने बताया कि गांव की 80 फीसदी आबादी की आजीविका दूध पर टिकी हुई है जबकि देश की 65 फीसदी आबादी कृषि पर आधारित है।

Source: Uttarpradesh

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