चीन को जवाब, चेन्नै से जाफना के लिए उड़ान

जाफना
श्रीलंका के के लिए चेन्नै से उड़ान भरी। यूं तो यह दूरी तय करने में तकरीबन एक घंटे का वक्त लगता है लेकिन इस बार इस दूरी को तय करने में एयर इंडिया की सहयोगी कंपनी एलायंस एयर को 40 साल का वक्त लग गया। श्री लंका में लिट्टे के नेतृत्व में सिविल युद्ध के 40 साल के अंतराल के बाद चेन्नै से जाफना के लिए कमर्शल ऑपरेशन शुरू हुआ।

जाफना को द्वारा विकसित किया गया है। इसे हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। इसे 1,950 मिलियन रुपये (श्री लंकाई मुद्रा) की लागत से दोबारा विकसित किया गया है। उद्घाटन के बाद श्री लंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि जाफना क्षेत्र में आर्थिक विकास के लिए भारत-श्री लंका के बीच सहयोग में क्षमता है।

‘आंतरिक वार्ता के तहत सभी मुद्दों को हल करना चाहिए’
उन्होंने कहा, ‘भारत ने जाफना के विकास में रुचि दिखाई और फंड आवंटित किया। भारत ने जाफना एयरपोर्ट को विकसित करने के लिए 300 मिलियन रुपये (श्रीलंकाई करंसी) का निवेश किया। हिंद महासागर में साउथ एशिया तेजी से विकसित क्षेत्र होगा। हमें आंतरिक वार्ता के तहत सभी मुद्दों को हल करना चाहिए।’

‘कोलंबो से ज्यादा चेन्नै जाना हुआ आसान’
उत्तरी प्रांत के गवर्नर सुरेन राघवन ने कहा कि जाफना एयरपोर्ट के विकास कभी बदहाल पड़े इस इलाके को सुधारना था। उद्घाटन वाले दिन एयरपोर्ट पर एलायंस एयर फ्लाइट की लैंडिंग के बारे में उन्होंने कहा, ‘यह न सिर्फ एक एयरपोर्ट का संचालन है लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिश्तों को सुधारना है। अब कोलंबो जाने से चेन्नै जाना ज्यादा आसान हो गया है।’ भारत के लिए सामरिक लिहाज से श्री लंका एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

सीधे दक्षिण भारत से जुड़ेगा तमिल समुदाय
यह एयरपोर्ट होने से उत्तरी क्षेत्र में रहने वाले तमिल समुदाय के लोग सीधे तौर पर दक्षिण भारत, मलयेशिया और थाइलैंड से जुड़ जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, भारत ने उत्तर में कनकेसंथुराई एयरपोर्ट और दक्षिण में मताला इंटरनैशनल एयरपोर्ट को विकसित करने का भी प्रस्ताव दिया है। मताला एयरपोर्ट चीन द्वारा विकसित हंबनटोटा पोर्ट के काफी करीब है।

क्यों खास है पलाली?
पलाली अपने आप में काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संवेदनशील तमिल बहुल उत्तरी प्रांत में है, जो पारंपरिक तौर पर भारत के करीब रहा है। यहां विकास कार्यों के जरिए भारत श्री लंका के इस हिस्से में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है।

Source: National

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