बिलासपुर, 12 अक्टूबर 2019 छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष सलाम रिजवी जानकारी के अनुसार
छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड द्वारा गठित 6 सदस्यीय पर्यवेक्षक दल कल एक दिवसीय दौरे पर बिलासपुर पहुंचा। यहां वक्फ सम्पत्तियों के लेकर जारी विवाद के निपटारे के लिए सभी पक्षों को सुना गया। इस दौरान वक्फ संस्थाओं की पूर्व कमेटियों की घोर लापरवाही सामने आई जिसके चलते वक्फ की काफी सम्पत्तियां अवैध रूप से बेच दी गई और तत्कालीन राजस्व अमले ने भी इस कार्य में सहयोग दिया। इन मामलों में पर्यवेक्षक दल की रिपोर्ट के आधार पर छ.ग. राज्य वक्फ बोर्ड अग्रिम कार्यवाही करेगा। छत्तीसगढ़ में प्रदेश भर में अनेक मस्जिद, मदरसों और दरगाहों की वक्फ सम्पत्तियाें की देख-रेख और संचालन को लेकर काफी विवाद है जिसके निपटारे की पहल आज तक नहीं की गई। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त अध्यक्ष सलाम रिजवी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रमुख स्थानों पर आब्जर्वर/पर्यवेक्षक दल भेजने की शुरूआत की है। इसी कड़ी में 6 सदस्यीय पर्यवेक्षक दल बिलासपुर पहुंचा जिसमें मो.शहाबुद्दीन, मो.ताहिर, सैयद अकील, शाहिद इकबाल, समीर रजा, शमी ईमाम, एवं असलम रोकड़िया शामिल किये गये जो बिलासपुर के लिए वक्फ बोर्ड द्वारा गठित आब्जर्वर दल के सदस्य हैं। आॅब्जर्वर दल के सदस्यों ने सुन्नी हुसैनी मस्जिद, तालापारा बिलासपुर, जूना मस्जिद बिलासपुर एवं दरगाह वक्फ अलल औलाद, मचखण्डा की कमेटीयों के सदर/सदस्यों के अतिरिक्त अन्य पक्षों से भेंट कर चर्चा की और उन्हें सुना। इस दौरान न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी, वक्फ सम्पत्तियों की आय-व्यय, वक्फ सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे एवं अन्य मामलों पर चर्चा की गई और वक्फ सम्पत्तियों के दस्तावेजों का अवलोकन किया गया। सुन्नी हुसैनी मस्जिद तालापारा बिलासपुर की पूर्व और वर्तमान पदाधिकारीयों और जमातियों ने बारी-बारी से अपना पक्ष रखा। यहां प्रमुख विवाद मस्जिद के पूर्व ईमाम को निकाले जाने को लेकर है। मस्जिद की वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और इसी कमेटी ने पूर्व ईमाम को बाहर कर दिया था। जबकि पूर्व की कमेटी के पदाधिकारीयों एवं अन्य द्वारा पूर्व ईमाम को ही रखने का दबाव बनाया जा रहा है। इसी प्रकार से पूर्व की कमेटी पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है जिसकी जांच की जायेगी।
इसी प्रकार जूना मस्जिद बिलासपुर के अध्यक्ष ने अपने लम्बे कार्यकाल के सम्बंध में आब्जर्वर दल के समक्ष अपना पक्ष रखा। वक्फ बोर्ड की ओर से बिलासपुर पहुंचे आॅब्जर्वर दल ने अंतिम में दरगाह ग्राम मचखण्डा का दौरा किया। यहां वक्फ अलल औलाद जैनुद्दीन ग्राम मचखण्डा की वक्फ सम्पत्तियों की देख-रेख भूतपर्वू मालगुजार स्वर्गीय जैनुद्दीन के वंशजों द्वारा किया जाता रहा है। पर्यवेक्षक दल को स्व.जैनुद्दीन के वारिसानों ने बताया कि पूर्व में मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड की ओर से वक्फ अलल औलाद जैनुद्दीन ग्राम मचखण्डा की 165 एकड़ जमीन के बारे में राजपत्र में प्रकाशन किया गया था। आज इस जमीन का अधिकांश हिस्सा निजी लोगों के अवैध कब्जे में है। पूछ-ताछ के दौरान पता चला कि जैनुद्दीन के ही कुछ वंशजों ने बैनामा देकर जमीनों की बिक्री की है, राजस्व विभाग के लोगों ने दस्तावेजों में हेरा-फेरी कर रजिस्ट्री में सहयोग दिया है। हालांकि बाद में शिकायत करने पर रजिस्ट्री रोक दी गई। तब यह मामला जबलपुर हाईकोर्ट में चला और फैसला वक्फ अलल औलाद जैनुद्दीन ग्राम मचखण्डा के पक्ष में आया, मगर प्रशासन ने अब तक वक्फ की अवैध कब्जे वाली जमीनों को अवैध कब्जे से आज तक खाली नहीं कराया है। यहां की करोड़ों रूपयों की वक्फ की जमीनों पर अवैध रूप से कई लोगों द्वारा कब्जा कर लिया गया है। आॅब्जर्वर दल ने इस सम्बंध में विस्तृत जानकारी लेकर कार्यालय, छ.ग.राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से विधिवत् कार्यवाही का आश्वासन दिया है।

