*1 नवंबर से 3358 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी शुरू करे सरकार, किसानों के साथ धोखाधड़ी बंद हो – कांग्रेस*

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी



*1 नवंबर से 3358 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी शुरू करे सरकार, किसानों के साथ धोखाधड़ी बंद हो – कांग्रेस*
*रकबा, गिरदावली, पंजीयन, टोकन, तौल और भुगतान को लेकर ठोस कार्ययोजना बनाएं सरकार*
रायपुर/09 अक्टूबर 2026। 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग करते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि खरीफ की फसल तैयार होने को है लेकिन सरकार की तैयारी कहीं दिख नहीं रही है। न बारदानों की व्यवस्था, न सोसायटियों की फंड, न भुगतान के लिए बजट, न परिवहन का टेंडर छत्तीसगढ़ के किसान आज भाजपा सरकार की वादाखिलाफी और तानाशाही नीतियों का दंश झेल रहे हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के दौरान बजट प्रावधान के बावजूद खरीफ सीजन 2022-23 की चौथे किस्त का 1700 करोड़ रुपया दबाकर बैठी साय सरकार। सरकार किसानों के पैसे का ब्याज खा रही है या खजाना खाली हो चुका है? अब जबरिया रकबा समर्पण का घिनौना खेल, खेल रही है ताकि किसानों से कम धान खरीदना पड़े। कांग्रेस पार्टी स्पष्ट चेतावनी देती है कि 1 नवंबर से 3358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी शुरू की जाए और किसानों का एक-एक पैसा तुरंत जारी हो, वरना कांग्रेस हर जिले में सड़कों पर उतरकर किसान आंदोलन की अगुवाई करेगी।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि 3100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से 21 क्विंटल प्रति एकड़ और हर ग्राम पंचायत में नगद भुगतान केंद्र खोल कर एकमुश्त देने का मोदी गारंटी का वादा जुमला निकला। अन्नदाता का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा। धान के कटोरे में किसान को अपने ही हक के पैसे के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, यह छत्तीसगढ़िया अस्मिता पर चोट है। जब चुनाव में वोट लेना था तब कोई वेरिफिकेशन याद नहीं आया, अब भुगतान के समय नियम-कायदे, किंतु परंतु क्यों?
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि 1 नवंबर की जगह खरीदी टालने की कोशिशें हो रही हैं। जब कांग्रेस सरकार में 1 नवंबर से पारदर्शी तरीके से धान खरीदी हो सकती थी, तो भाजपा सरकार को खरीदी शुरू करने और तंत्र बनाने में पसीने क्यों छूट रहे हैं? किसानों के हक का 1700 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान अब तक अटका हुआ है। त्योहारी सीजन और अगली फसल की तैयारी के वक्त भुगतान रुकने से किसान कर्ज के जाल में फँस रहे हैं। जबरिया रकबा समर्पण, सर्वे के नाम पर किसानों की पंजीकृत भूमि घटाने के जरिए सरकार धान खरीदी का बजट कम करने की प्रशासनिक साजिश रच रही है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि पिछले ढाई साल में केंद्र सरकार ने धान के एमएसपी में कुल 258 रुपए की वृद्धि की है, 2023 में वादा 3100 का था उस राशि में 258 जोड़कर किसानों को मिलना ही चाहिए, जिससे 3358 रुपये प्रति क्विंटल की माँग पूरी तरह वाजिब है। महंगाई के अनुपात में वर्तमान दर नाकाफी है।
सुरेंद्र वर्मामुख्य प्रवक्ताछत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटीमोबाइल 98262-74000

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