*तेलीबांधा नाम बरकरार रखना जनभावना, इतिहास और सामाजिक सम्मान की जीत – देवेंद्र साहू, जिला उपाध्यक्ष*



*तेलीबांधा नाम बरकरार रखना जनभावना, इतिहास और सामाजिक सम्मान की जीत – देवेंद्र साहू, जिला उपाध्यक्ष*
*नाम परिवर्तन के प्रस्ताव पर विराम से साहू समाज सहित आम नागरिकों में संतोष*
राजनांदगांव। राजधानी रायपुर के हृदय स्थल तेलीबांधा चौक का नाम बदलकर ‘सेवा संकल्प चौक’ किए जाने के प्रस्ताव पर शासन द्वारा रोक लगाए जाने से साहू समाज सहित आम नागरिकों में संतोष है। इसे केवल नाम परिवर्तन की प्रक्रिया पर विराम के रूप में नहीं, बल्कि जनभावना, ऐतिहासिक पहचान और सामाजिक सम्मान के प्रति संवेदनशीलता के रूप में देखा जा रहा है।विगत दिनों तेलीबांधा चौक के नाम परिवर्तन को लेकर प्रदेशभर में चर्चा हुई। विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने अपनी भावनाएं शासन के समक्ष रखीं। साहू समाज ने भी इस विषय को किसी व्यक्ति, संस्था अथवा विचारधारा के विरोध के रूप में नहीं, बल्कि इतिहास, परंपरा और सामाजिक स्मृति के संरक्षण से जुड़े विषय के रूप में उठाया।
*तेलीबांधा महज एक चौक का नाम नहीं है। यह नाम छत्तीसगढ़ की मिट्टी, मेहनतकश परंपरा और पीढ़ियों से जुड़ी स्थानीय स्मृतियों का हिस्सा है।* किसी स्थान का नाम वहां के इतिहास और लोगों की भावनाओं से जुड़ जाता है। इसलिए ऐसे नामों में परिवर्तन से पहले व्यापक जनसंवाद और संबंधित समाज एवं नागरिकों की भावनाओं को समझना आवश्यक है। इस विषय पर जिला साहू संघ राजनांदगांव सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी तथा आम नागरिकों ने लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी। शासन द्वारा जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रस्ताव पर रोक लगाए जाने का निर्णय स्वागत योग्य है।यह विषय किसी समाज की जीत या किसी की हार का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक संवाद, लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और छत्तीसगढ़ की भाईचारे की परंपरा की मजबूती का संदेश है। समाज को विभाजित करने वाली अफवाहों से बचते हुए ऐतिहासिक एवं सामाजिक विषयों पर तथ्य, संवाद और आपसी सम्मान के साथ आगे बढ़ना ही उचित है।जिला उपाध्यक्ष देवेंद्र साहू सहित जिला साहू समाज राजनांदगांव ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी एवं शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भविष्य में ऐतिहासिक एवं जनभावना से जुड़े स्थलों के नाम में किसी भी परिवर्तन से पूर्व संबंधित सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए।

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