*भारतीय ज्ञान-विज्ञान संस्कृति परीक्षा में संस्कारों की गूंज: दानी गर्ल्स स्कूल में 1000 छात्राओं ने दी परीक्षा, गायत्री परिवार और प्रभारियों ने संभाली व्यवस्था….*
*रायपुर।* भारतीय ज्ञान-विज्ञान संस्कृति परीक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास इस वर्ष भी राजधानी रायपुर में देखने को मिला। दानी गर्ल्स स्कूल परीक्षा केंद्र में करीब 1000 छात्राओं ने उत्साहपूर्वक परीक्षा में हिस्सा लिया। परीक्षा के सफल संचालन में गायत्री परिवार के पदाधिकारियों एवं परीक्षा प्रभारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली इस परीक्षा में इस वर्ष भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। बताया गया कि प्रदेश सहित देशभर में आयोजित परीक्षा में इस वर्ष करीब ढाई लाख परीक्षार्थियों ने सहभागिता की। परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान, संस्कृति, संस्कार और हमारी सनातन परंपराओं से परिचित कराना है।*तकनीकी शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी*:दानी गर्ल्स स्कूल के प्राचार्य हितेष दीवान सर ने कहा कि वर्तमान दौर में तकनीकी शिक्षा का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। तकनीकी शिक्षा समय की आवश्यकता है, लेकिन इसके साथ शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का ज्ञान भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन और पुरातन परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनसे जोड़कर रखना आवश्यक है।उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि वे समाज को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभाएं, बड़ों का सम्मान करें, बिजली और पानी का संरक्षण करें तथा शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों को भी आगे बढ़ाएं।
*गायत्री परिवार और प्रभारियों ने संभाली जिम्मेदारी*:परीक्षा के सफल एवं व्यवस्थित संचालन में गायत्री परिवार के प्रतिनिधियों तथा परीक्षा से जुड़े प्रभारियों की सक्रिय भूमिका रही। परीक्षा केंद्र पर श्री रामपाल तिवारी जी, छत्तीसगढ़ प्रभारी भारतीय ज्ञान-विज्ञान संस्कृति डी.पी. चंद्राकर जी रविशंकर गुप्ता जी सहित संबंधित पदाधिकारियों ने व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की और स्कूल स्टाफ के साथ समन्वय बनाकर परीक्षा का संचालन सुनिश्चित किया।
परीक्षा केंद्र पर प्राचार्य हितेष दीवान,श्रीमती समिधा उपासने, क्रांति चंद्रा (मिडिल एचएम), डॉ. वैजयंती गुप्ता,श्रीमती मीनू पांडेय, श्रीमती ज्योति सक्सेना, सुषमा शर्मा (मिडिल प्रभारी), गायत्री परिवार के प्रतिनिधि एवं अन्य स्टाफ उपस्थित रहे। सभी ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए परीक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में सहयोग दिया।
*परीक्षा से आगे संस्कारों की पाठशाला*:भारतीय ज्ञान-विज्ञान संस्कृति परीक्षा केवल विद्यार्थियों की परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और संस्कारों की समझ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। दानी गर्ल्स स्कूल में बड़ी संख्या में छात्राओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों को जानने की रुचि आज भी विद्यार्थियों में बनी हुई है।
गायत्री परिवार एवं परीक्षा से जुड़े सभी प्रभारियों ने परीक्षा के दौरान व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दानी गर्ल्स स्कूल में आयोजित परीक्षा ने शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति को जोड़ने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया।
प्रतिवर्ष आयोजित होने वाली इस परीक्षा में इस वर्ष भी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल हुए। बताया गया कि प्रदेश सहित देशभर में आयोजित परीक्षा में इस वर्ष करीब ढाई लाख परीक्षार्थियों ने सहभागिता की। परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान, संस्कृति, संस्कार और हमारी सनातन परंपराओं से परिचित कराना है।*तकनीकी शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी*:दानी गर्ल्स स्कूल के प्राचार्य हितेष दीवान सर ने कहा कि वर्तमान दौर में तकनीकी शिक्षा का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। तकनीकी शिक्षा समय की आवश्यकता है, लेकिन इसके साथ शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का ज्ञान भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन और पुरातन परंपराएं पीढ़ियों से चली आ रही हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना और उनसे जोड़कर रखना आवश्यक है।उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि वे समाज को बेहतर बनाने में अपनी भूमिका निभाएं, बड़ों का सम्मान करें, बिजली और पानी का संरक्षण करें तथा शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और संस्कारों को भी आगे बढ़ाएं।
*गायत्री परिवार और प्रभारियों ने संभाली जिम्मेदारी*:परीक्षा के सफल एवं व्यवस्थित संचालन में गायत्री परिवार के प्रतिनिधियों तथा परीक्षा से जुड़े प्रभारियों की सक्रिय भूमिका रही। परीक्षा केंद्र पर श्री रामपाल तिवारी जी, छत्तीसगढ़ प्रभारी भारतीय ज्ञान-विज्ञान संस्कृति डी.पी. चंद्राकर जी रविशंकर गुप्ता जी सहित संबंधित पदाधिकारियों ने व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की और स्कूल स्टाफ के साथ समन्वय बनाकर परीक्षा का संचालन सुनिश्चित किया।
परीक्षा केंद्र पर प्राचार्य हितेष दीवान,श्रीमती समिधा उपासने, क्रांति चंद्रा (मिडिल एचएम), डॉ. वैजयंती गुप्ता,श्रीमती मीनू पांडेय, श्रीमती ज्योति सक्सेना, सुषमा शर्मा (मिडिल प्रभारी), गायत्री परिवार के प्रतिनिधि एवं अन्य स्टाफ उपस्थित रहे। सभी ने अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए परीक्षा व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में सहयोग दिया।
*परीक्षा से आगे संस्कारों की पाठशाला*:भारतीय ज्ञान-विज्ञान संस्कृति परीक्षा केवल विद्यार्थियों की परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और संस्कारों की समझ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। दानी गर्ल्स स्कूल में बड़ी संख्या में छात्राओं की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों को जानने की रुचि आज भी विद्यार्थियों में बनी हुई है।
गायत्री परिवार एवं परीक्षा से जुड़े सभी प्रभारियों ने परीक्षा के दौरान व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालते हुए आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। दानी गर्ल्स स्कूल में आयोजित परीक्षा ने शिक्षा के साथ संस्कार और संस्कृति को जोड़ने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया।

