संकेत साहित्य समिति का 46वां स्थापना दिवस मनाया गया

दिनांक 24,09,2026
संकेत साहित्य समिति का 46वां स्थापना दिवस मनाया गया
राजभाषा हिंदी पर परिचर्चा और काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों ने रखे विचार, डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड को मिला ‘संकेत साहित्य रत्न’ सम्मान
रायपुर। संकेत साहित्य समिति का 46वां स्थापना दिवस शुक्रवार को वृंदावन हॉल, रायपुर में राजभाषा हिंदी पर केंद्रित परिचर्चा एवं सरस काव्य गोष्ठी के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में कोलकाता से पहुंचे भाषाविद्, साहित्यकार एवं ‘साहित्य त्रिवेणी’ के संपादक डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड मुख्य अतिथि रहे। छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। भाषाविद् एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. चितरंजन कर, व्यंग्यकार गिरीश पंकज और हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. रेशमा अंसारी सारस्वत अतिथि के रूप में मौजूद रहे।कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की पूजा-अर्चना से हुई। समिति की ओर से अतिथियों का अंगवस्त्र एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड को ‘संकेत साहित्य रत्न’ सम्मान से सम्मानित किया गया।संकेत साहित्य समिति के संस्थापक एवं प्रांतीय अध्यक्ष डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ ने स्वागत उद्बोधन में हिंदी के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की संवाहिका भी है, जो देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों लोगों को जोड़ती है।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शशांक शर्मा ने कहा कि संपर्क भाषा के रूप में हिंदी के सामने कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि हिंदी के समक्ष चुनौती इस कारण है कि अंग्रेजी को ज्ञान की भाषा के रूप में अधिक महत्व दिया जाता है। उन्होंने साहित्य में हिंदी के सरलीकरण को समय की आवश्यकता बताया।मुख्य अतिथि डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड ने हिंदी के इतिहास और महत्व पर विचार रखते हुए कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों, सांस्कृतिक चेतना, संवेदना और सामूहिक विचारधारा की भाषा भी है। उन्होंने राजभाषा हिंदी को केंद्र में रखकर आयोजित कार्यक्रम को साहित्यिक चेतना और रचनात्मक संवाद का उदाहरण बताया।डॉ. चितरंजन कर ने कहा कि भाषा संस्कृति और चेतना का स्वरूप होती है। व्यंग्यकार गिरीश पंकज ने हिंदी के वैश्विक विस्तार पर प्रकाश डालते हुए इसके भविष्य को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. रेशमा अंसारी ने वर्तमान परिवेश में हिंदी की भूमिका पर चर्चा करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से हिंदी के विकास की संभावनाओं को रेखांकित किया और देवनागरी लिपि के संरक्षण पर जोर दिया।इसके बाद पल्लवी झा के संचालन में काव्य गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए कवियों एवं कवयित्रियों ने रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम में डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड, डॉ. चितरंजन कर, गिरीश पंकज, डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, डॉ. रेशमा अंसारी, मीर अली ‘मीर’, राजेश जैन ‘राही’, उदयभान सिंह चौहान, सुरेंद्र रावल, डॉ. दीनदयाल साहू, मधु मार्तंड, संजीव ठाकुर, डॉ. रविंद्र सरकार, सुषमा पटेल, हरीश कोटक, राजकुमार सोनी, छबिलाल सोनी, गणेशदत्त झा, यशवंत यदु, राजेंद्र रायपुरी, विवेक राहटगांवकर, एच.एल. चंद्राकर, दिलीप वरवंडकर, डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव, राजेंद्र ओझा, कुमार जगदली, नर्मदा प्रसाद विश्वकर्मा सहित अनेक रचनाकारों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम के अंत में संयोजक हरीश कोटक ने अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित रचनाकारों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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