सेवा संकल्प से पोषण संकल्प तक : जंक फूड पर खर्च नहीं, उस पैसे में पोषण की थाली….

रायपुर: सेवा केवल किसी जरूरतमंद की मदद करना नहीं, बल्कि समाज के स्वास्थ्य और खुशहाली के लिए अपनी जिम्मेदारी समझना भी है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ इसी भावना को जन-जन तक पहुंचाने का अवसर है। इस संकल्प को हम बच्चों के पोषण से भी जोड़ सकते हैं। जंक फूड पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम कर उसी राशि का उपयोग पौष्टिक भोजन के लिए करना है।

आज चिप्स, नमकीन, क्रीम बिस्कुट, चॉकलेट और मीठे पेय बच्चों की पसंद बनते जा रहे हैं। एक दिन का 20-30 रूपये का खर्च छोटा लग सकता है, लेकिन यही राशि महीने में 600-900 रूपये तक पहुंच सकती है। यदि इसी पैसे को सोच-समझकर खर्च किया जाए तो उपलब्धता के अनुसार भुना चना, मूंगफली, केला, मौसमी फल, पोहा, उपमा, दूध या घर के बने नाश्ते जैसे विकल्प बच्चों के भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। सवाल केवल यह नहीं कि हम कितना खर्च कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि उस खर्च से बच्चे को कितना पोषण मिल रहा है।

पैकेट’ से ‘प्लेट’ की ओर
बच्चों की पसंद एक दिन में नहीं बदलती। इसलिए धीरे-धीरे विकल्प बदलना बेहतर है। चिप्स की जगह भुना चना-मूंगफली, पैकेट नमकीन की जगह घर का पोहा या चिवड़ा, क्रीम बिस्कुट की जगह केला-चना, मीठे पेय की जगह दूध या छाछ और इंस्टेंट नूडल्स की जगह सब्जियों वाला पोहा या उपमा दिया जा सकता है।
यह किसी खाद्य पदार्थ को पूरी तरह ‘बुरा’ बताने की बात नहीं है, बल्कि बच्चों के भोजन में स्थानीय, विविध और पौष्टिक विकल्पों की हिस्सेदारी बढ़ाने का प्रयास है।

पोषण की शुरुआत घर से

पोषण के लिए हमेशा महंगे खाद्य पदार्थ जरूरी नहीं होते। चना, मूंगफली, दालें, सोयाबीन, रागी एवं अन्य मोटे अनाज, हरी सब्जियां, मौसमी फल, दूध, दही और अंडा जैसे खाद्य पदार्थ कम खर्च में भोजन को अधिक विविध और पौष्टिक बनाने में मदद कर सकते हैं।
पोहा में सब्जियां और मूंगफली मिलाना, अंकुरित चना या मूंग को नाश्ते में शामिल करना और मौसम के अनुसार फल देना। ऐसे छोटे प्रयास बच्चों की भोजन संबंधी आदतों में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। बच्चे को केवल “चिप्स मत खाओ” कहने के बजाय यह कहना अधिक प्रभावी हो सकता है “चलो, इतने ही पैसे में कुछ ऐसा लेते हैं, जो स्वादिष्ट भी हो और तुम्हें ताकत भी दे।” यही संवाद पोषण की समझ की शुरुआत बन सकता है।

हर घर से उठे पोषण का संकल्प

सेवा संकल्प अभियान को जनभागीदारी का स्वरूप देने में परिवार की भूमिका महत्वपूर्ण है। बच्चे की थाली में एक फल जोड़ना, पौष्टिक नाश्ता देना, घर के भोजन को प्राथमिकता देना या जंक फूड पर होने वाले अनावश्यक खर्च को कम करना, ये सेवा के छोटे लेकिन सार्थक रूप हैं।
आइए, सेवा संकल्प के साथ पोषण का संकल्प भी लें, जंक फूड पर अनावश्यक खर्च कम करेंगे, स्थानीय और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देंगे और बच्चों के स्वस्थ भोजन संबंधी आदतों की शुरुआत घर से करेंगे। क्योंकि एक पैकेट कम और एक पौष्टिक विकल्प अधिक बच्चे के स्वस्थ भविष्य की दिशा में एक छोटा लेकिन सार्थक कदम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *