पहले गांधी उद्यान था, आज बदहाली के आंसू बहा रहा, स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान पर उठे सवाल

पहले गांधी उद्यान था, आज बदहाली के आंसू बहा रहा, स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान पर उठे सवाल

अशोक चक्र और सेनानी स्तंभ की हो रही अनदेखी, चाट के ठेले और पार्किंग के बीच घिरा ऐतिहासिक स्थल
कांकेर। कांकेर शहर के बीचों-बीच गांधी उद्यान के नाम से एक पहचान हुआ करती थी। लेकिन अब वही गांधी उद्यान टूट चुका है और बदहाली का शिकार हो गया है। नगर पालिका अंतर्गत आने वाले इस गांधी उद्यान को तोड़ दिया गया है। इसी उद्यान में अशोक चक्र और स्वतंत्रता सेनानियों का स्तंभ स्थापित है, जिसका आज कोई मान-सम्मान नहीं हो रहा है। सवाल यह है कि आखिर इसे तोड़ा क्यों गया। क्या पार्किंग के लिए तोड़ा गया, क्या चाट के ठेलों को लगाने के लिए तोड़ा गया, इसका उद्देश्य क्या था, यह अब तक स्पष्ट नहीं है।
गांधी चौक को क्यों तोड़ा गया, उद्देश्य पर उठ रहे सवाल
कभी जिला अस्पताल के ठीक सामने गांधी उद्यान हुआ करता था। गांधी उद्यान में अशोक चक्र और स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ मौजूद था, जहां सालों से स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर वीर जवानों को याद किया जाता था। लेकिन गांधी उद्यान को क्यों तोड़ा गया, यह समझ से परे है। नगर पालिका द्वारा इसे तोड़े जाने के बाद अशोक चक्र और स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ को बदहाल स्थिति में छोड़ दिया गया है। लोगों में चर्चा है कि क्या इसे पार्किंग के लिए तोड़ा गया या चौपाटी के ठेलों को बसाने के लिए, प्रशासन को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
अशोक चक्र स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ पर बैठकर लोग खा रहे चाट, हो रहा अपमान
आज गांधी उद्यान के इर्द-गिर्द चौपाटी के ठेले लगाए जा रहे हैं। सबसे दुखद स्थिति यह है कि लोग अशोक चक्र स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ पर बैठकर चाट खा रहे हैं। फुटकर सामान बेचने वाले लोग उसी स्तंभ पर अपना सामान रख रहे हैं। जहां कभी वीर स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया जाता था, आज उसी स्थान पर गंदगी पसर चुकी है। यह केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि शहीदों के सम्मान का प्रतीक है, जिसकी ऐसी उपेक्षा को विडंबना ही कहा जाएगा।
स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ की ऐसी बदहाली, जिला प्रशासन बना मूकदर्शक
बदहाल पड़े अशोक चक्र और स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ को लेकर किसी भी प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। इसे विडंबना ही कहा जाए कि महान स्वतंत्रता सेनानियों के नाम वाले स्तंभ और अशोक चक्र की बदहाली पर किसी की नजर नहीं पड़ रही है। जिला प्रशासन कहे या नगर पालिका, दोनों ही इस गंभीर मामले को भूलकर बैठे हैं। ऐतिहासिक धरोहर को इस तरह भुलाकर गांधी उद्यान को तोड़ना इतिहास में एक गलत नजीर बन गई है।
कुंभकर्णीय नींद से कब जागेगा प्रशासन, कब मिलेगा सेनानी स्तंभ को सम्मान
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांधी उद्यान शहर की पहचान था। अब वहां गंदगी और अतिक्रमण है। नागरिकों की मांग है कि अशोक चक्र और स्वतंत्रता सेनानी स्तंभ को उचित सम्मान दिया जाए, उसकी साफ-सफाई और संरक्षण किया जाए और गांधी उद्यान को फिर से व्यवस्थित किया जाए। सवाल बड़ा है कि महान स्वतंत्रता सेनानियों और अशोक स्तंभ की दुर्दशा पर जिला प्रशासन की कुंभकर्णीय नींद कब खुलेगी और कब इस स्तंभ को उसका मान-सम्मान मिलेगा।

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