*अपनी नाकामी छुपाने नक्सल पीड़ितों की नुमाइश कर उनके ज़ख्मो पर नमक छिड़क रही है सरकार – कांग्रेस*

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी



*अपनी नाकामी छुपाने नक्सल पीड़ितों की नुमाइश कर उनके ज़ख्मो पर नमक छिड़क रही है सरकार – कांग्रेस*
रायपुर/19 अगस्त 2026। नक्सल पीड़ितों के बहाने अपने कुशासन और वादाखिलाफी को छुपाने का आरोप लगाते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवारों से केवल छल ही किया है। झीरम के शहीद परिवारों को न्याय नहीं मिला, भाजपा के पूर्व विधायक भीमा मांडवी और शिवदयाल तोमर के परिजन भी इस सरकार पर आरोप लगा रहे हैं, फर्जी एनकाउंटर और क्रॉस फायरिंग में मारे गए आदिवासीयों को आज तक न्याय नहीं मिला। सरकार की समर्पण और पुनर्वास योजनाओं पर भरोसा करके मुख्य धारा में लौटे पूर्व नक्सली पुनर्वास, नौकरी और मुआवजे के लिए भटक रहे हैं, लेकिन हिंसा के शिकार हुए पीड़ित परिवारों को समय पर राहत और न्याय देने में नाकाम रही यह सरकार केवल उनके ज़ख्मों की नुमाइश करके राजनीति कर रही है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार पर नक्सल मुद्दों पर छल करने का आरोप लगाते हुए कहा है कि भाजपा इस संवेदनशील मुद्दे का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ और बयानबाजी के लिए करती है, जबकि जमीनी स्तर पर पीड़ितों की सुध नहीं ली जा रही। नक्सली हिंसा में जान गंवाने वाले, प्रभावित होने वाले पीड़ित परिवारों की मांगें इस सरकार में विगत ढ़ाई वर्षों से लंबित हैं, जिन पर यह सरकार गंभीर नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि बस्तर पंडुम 2025 के दौरान देश के गृह मंत्री अमित शाह ने जगदरपुर में यह वादा किया था कि नक्सल मुक्त होने वाले प्रत्येक गांव को 1-1 करोड़ रुपए विकास कार्यों के लिए अलग से दिए जाएंगे 31 मार्च 2026 को बस्तर सहित पूरा देश नक्सल मुक्त घोषित कर दिया गया लेकिन बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले 4 हजार गांवों को फूटी कौड़ी नहीं मिली उल्टे केंद्रीय बलों की तैनाती का हजारों करोड़ वसूले जा रहे हैं। नौकरी, मुआवजा और पुनर्वास के लाभ नहीं मिलने से पीड़ित परिवार गुस्से में, विधानसभा अध्यक्ष और गृह मंत्री के बंगले में प्रदर्शन कर चुके हैं। नक्सल पीड़ित परिवारों का आरोप है कि पुनर्वास नीति 2025 लागू होने के बावजूद उन्हें अब तक आर्थिक सहायता, नौकरी, आवास और बच्चों की शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाया है। रमन सिंह की सरकार में बस्तर की आदिवासी बेटियों को बार बाला के प्रशिक्षण का कुत्सित प्रयास हुआ था अब की सरकार सिलाई के प्रशिक्षण शिविर का झांसा देकर रैंप पर वॉक करवा रही है। बस्तरिया दर्द और नक्सल पीड़ितों के ज़ख्मों की नुमाईश ही इस सरकार की नीति है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *