एसडीएम ने कर दिया अपराध कार्रवाई कुछ नहीं, भू-अर्जन अधिकारी कलेक्टर, नंद कुमार चौबे एसडीएम को बचाने रद्द किया डावर्सन

रोक के बाद डायवर्जन अपराध, रायपुर एसडीएम ने कर दिया अपराध

कार्रवाई कुछ नहीं, भू-अर्जन अधिकारी कलेक्टर, नंद कुमार चौबे एसडीएम को बचाने रद्द किया डावर्सन- गड़बड़ी करके वापस रीव्यू , अपर कलेक्टर ने रद्द किया डायवर्सन
15 जून को कलेक्टर ने लगाई थी रोक, जुलाई में जारी हो गए कई व्यपवर्तन आदेश; रेलवे परियोजना की जमीनों के मुआवजे पर भी उठे सवाल


रायपुर :डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर के लिए 15 जून को 15 गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री, बंटांकन और डायवर्जन पर रोक लगाई गई। इसके बावजूद जुलाई में तेंदुआ और गुमा समेत रोक वाले क्षेत्र से जमीन के उपयोग परिवर्तन के आदेश सामने आ गए। सवाल यह है कि जब कलेक्टर के आदेश से जमीन के डायवर्जन पर रोक थी तो उसके बाद व्यपवर्तन आदेश किस आधार पर जारी किए गए? यदि रोक प्रभावी थी तो आदेश जारी करने वाले राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। उपलब्ध दस्तावेजों में 8 से 19 जुलाई के बीच तेंदुआ में कई व्यपवर्तन आदेश सामने आए हैं। गुमा में खसरा क्रमांक 238/1 के उपयोग परिवर्तन का आदेश भी 19 जुलाई का है। अब मामला केवल नियमों की अनदेखी तक सीमित नहीं है। रेलवे परियोजना के लिए भविष्य में भूमि अधिग्रहण हुआ तो इन जमीनों के बदले मिलने वाले मुआवजे पर भी इन उपयोग परिवर्तनों का असर पड़ सकता है। इसलिए रोक के बावजूद हुए प्रत्येक डायवर्जन की जांच और आदेशों की वैधता स्पष्ट करना जरूरी है।
रोक के बाद आदेश तो किसकी अनुमति से?
15 जून को जारी रोक के बाद भी यदि संबंधित जमीनों के व्यपवर्तन आवेदन स्वीकार किए गए और आदेश जारी हुए, तो इसकी पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है। प्रशासन को यह बताना होगा कि इन प्रकरणों में आवेदन कब हुए, स्थल निरीक्षण कब हुआ, फाइल किस अधिकारी के पास गई और आदेश किस आधार पर जारी किए गए। खासतौर पर रोक के बाद जारी आदेशों में संबंधित एसडीएम की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
एक सप्ताह में बदल गई जमीन की प्रकृति
उपलब्ध दस्तावेजों में तेंदुआ क्षेत्र के कई मामलों में 8 जुलाई से 19 जुलाई के बीच व्यपवर्तन आदेश जारी होने की जानकारी है। गुमा में खसरा 238/1 का उपयोग परिवर्तन 19 जुलाई को किया गया। यानी रोक लागू होने के बाद भी जमीन की दर्ज उपयोग प्रकृति बदलने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब यह सवाल भी उठ रहा है कि इन प्रकरणों में रोक की जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी या नहीं।
मुआवजे का खेल तो नहीं?
रेलवे के डेडिकेटेड फ्रेट कारिडोर के लिए इन गांवों में भूमि अधिग्रहण की संभावना के बीच कृषि जमीन का औद्योगिक या व्यावसायिक उपयोग में बदलना गंभीर सवाल खड़ा करता है। भूमि का दर्ज उपयोग बदलने से उसके मूल्यांकन और संभावित मुआवजे पर असर पड़ सकता है। इसलिए रोक के दौरान हुए सभी व्यपवर्तनों की समयबद्ध जांच जरूरी है।
महत पंद्रह दिन के भीतर बदला भुमि-उपयोगआवेदक – गांव – जमीन – क्षेत्रफल – उपयोग रामसुमिरन वर्मा – तेंदुआ- खसरा – 366/ 32 – 930 वर्गमीटर – व्यावसायिक
रश्मी अग्रवाल – तेंदुआ – खसरा 86/4 – 1410 वर्गमीटर – औद्योगिकइंटर डोमीनियन लाजिस्टिक संजय झुंझुन वाला – तेंदुआ- 89/8- 32 54 वर्गफिट – औद्योगिक
इंटर डोमीनियन लाजिस्टिक संजय झुंझुन वाला – तेंदुआ- 89/5- 1669 वर्गफिट – औद्योगिकसुरेंद्र सिंह व रितिक अग्रवाल – कुम्हारी – खसरा 714/1 – 810 वर्गमीटर – औद्योगिक
सबीहुद्दीन – कुरां – खसरा 1378/3 – 1750 वर्गमीट – व्यावसायिकअनिल तिवारी – गुमा – खसरा 703/1 – 1070 वर्गमीटर – औद्योगिक
अनिल तिवारी – गुमा – खसरा 703/2 – 1070 वर्गमीटर – औद्योगिकमहेंद्र सिंह – गुमा- खसरा – 710/62 – 770 वर्गमीटर – औद्योगिक
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