पप्पू यादव पर हिन्दू सेना के प्रदेश महासचिव डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर का तीखा हमला
“नौटंकी की राजनीति से जनता अब हो चुकी है सतर्क” – डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर
साधु वेश विवाद पर हिन्दू सेना का बड़ा बयानभगवा की मर्यादा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, जनभावनाओं का सम्मान जरूरी – डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर
साधु वेश में संसद प्रदर्शन पर हिन्दू सेना के प्रदेश महासचिव डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने जताई कड़ी आपत्ति
रायपुर। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव द्वारा संसद में राम मंदिर दान चोरी के मुद्दे को लेकर साधु वेश धारण कर प्रदर्शन किए जाने के बाद देशभर में इस विषय को लेकर राजनीतिक और धार्मिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी मुद्दे पर रूद्र सेना के प्रदेश महासचिव डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन धर्म और आस्था से जुड़े प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक प्रदर्शन के लिए करना समाज में अनावश्यक विवाद पैदा करता है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब राजनीतिक नौटंकी और वास्तविक जनसेवा के बीच का अंतर भलीभांति समझ चुकी है।
भगवा वस्त्र सनातन परंपरा का प्रतीक, इसे राजनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए
हिन्दू सेना के प्रदेश महासचिव डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि भगवा वस्त्र केवल एक रंग या वेशभूषा नहीं बल्कि सनातन संस्कृति, त्याग, तपस्या, सेवा, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक जीवन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की परंपरा भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है और उसकी गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक तथा जनप्रतिनिधि का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक संदेश देने या विरोध प्रदर्शन के लिए किया जाएगा तो इससे समाज में भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न होगी। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से धार्मिक आस्थाओं के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की।
संत समाज के विरोध को बताया स्वाभाविक, धार्मिक भावनाओं के सम्मान की कही बात
डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि दिल्ली में संत समाज द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि साधु माधव गिर गाय वाले बाबा सहित कई संतों ने भगवा वस्त्र की गरिमा और साधु परंपरा की मर्यादा का प्रश्न उठाया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का दायित्व बनता है कि वे संवाद के माध्यम से स्थिति को स्पष्ट करें और समाज में सौहार्द बनाए रखें। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था का सम्मान लोकतांत्रिक मूल्यों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जनता अब दिखावे की नहीं, विकास और जनसेवा की राजनीति चाहती है
हिन्दू सेना के प्रदेश महासचिव डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि देश की जनता अब पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक और सजग हो चुकी है। उन्होंने कहा कि केवल वेशभूषा बदलकर, प्रतीकात्मक प्रदर्शन करके या भावनात्मक मुद्दों को उछालकर जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। आज का मतदाता विकास, पारदर्शिता, सुशासन और जनसेवा के आधार पर अपना निर्णय लेता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन विरोध का तरीका भी गरिमापूर्ण और संवैधानिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जिम्मेदार राजनीति और सनातन परंपरा के सम्मान का किया आह्वान
डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि भारत विविध धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का देश है, जहां सभी आस्थाओं का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सार्वजनिक जीवन में संयम, मर्यादा और जिम्मेदारी का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से सकारात्मक राजनीति करने, धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाए रखने तथा विकास और जनकल्याण को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता अब भावनात्मक नारों और राजनीतिक नाटकीयता से आगे बढ़ चुकी है तथा वही नेतृत्व स्वीकार करेगी जो ईमानदारी, संवेदनशीलता और जनसेवा के माध्यम से समाज का विश्वास जीतने का कार्य करेगा।
साधु वेश विवाद पर हिन्दू सेना का बड़ा बयानभगवा की मर्यादा से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, जनभावनाओं का सम्मान जरूरी – डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर
साधु वेश में संसद प्रदर्शन पर हिन्दू सेना के प्रदेश महासचिव डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने जताई कड़ी आपत्ति
रायपुर। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव द्वारा संसद में राम मंदिर दान चोरी के मुद्दे को लेकर साधु वेश धारण कर प्रदर्शन किए जाने के बाद देशभर में इस विषय को लेकर राजनीतिक और धार्मिक बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी मुद्दे पर रूद्र सेना के प्रदेश महासचिव डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन धर्म और आस्था से जुड़े प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक प्रदर्शन के लिए करना समाज में अनावश्यक विवाद पैदा करता है। उन्होंने कहा कि देश की जनता अब राजनीतिक नौटंकी और वास्तविक जनसेवा के बीच का अंतर भलीभांति समझ चुकी है।
भगवा वस्त्र सनातन परंपरा का प्रतीक, इसे राजनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए
हिन्दू सेना के प्रदेश महासचिव डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि भगवा वस्त्र केवल एक रंग या वेशभूषा नहीं बल्कि सनातन संस्कृति, त्याग, तपस्या, सेवा, राष्ट्रभक्ति और आध्यात्मिक जीवन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि साधु-संतों की परंपरा भारत की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर है और उसकी गरिमा बनाए रखना प्रत्येक नागरिक तथा जनप्रतिनिधि का नैतिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि धार्मिक प्रतीकों का उपयोग राजनीतिक संदेश देने या विरोध प्रदर्शन के लिए किया जाएगा तो इससे समाज में भ्रम और विवाद की स्थिति उत्पन्न होगी। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से धार्मिक आस्थाओं के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की।
संत समाज के विरोध को बताया स्वाभाविक, धार्मिक भावनाओं के सम्मान की कही बात
डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि दिल्ली में संत समाज द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि साधु माधव गिर गाय वाले बाबा सहित कई संतों ने भगवा वस्त्र की गरिमा और साधु परंपरा की मर्यादा का प्रश्न उठाया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का दायित्व बनता है कि वे संवाद के माध्यम से स्थिति को स्पष्ट करें और समाज में सौहार्द बनाए रखें। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था का सम्मान लोकतांत्रिक मूल्यों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जनता अब दिखावे की नहीं, विकास और जनसेवा की राजनीति चाहती है
हिन्दू सेना के प्रदेश महासचिव डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि देश की जनता अब पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक और सजग हो चुकी है। उन्होंने कहा कि केवल वेशभूषा बदलकर, प्रतीकात्मक प्रदर्शन करके या भावनात्मक मुद्दों को उछालकर जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। आज का मतदाता विकास, पारदर्शिता, सुशासन और जनसेवा के आधार पर अपना निर्णय लेता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन विरोध का तरीका भी गरिमापूर्ण और संवैधानिक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच की गरिमा बनाए रखना सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जिम्मेदार राजनीति और सनातन परंपरा के सम्मान का किया आह्वान
डॉक्टर चोलेश्वर चंद्राकर ने कहा कि भारत विविध धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं का देश है, जहां सभी आस्थाओं का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक उपयोग सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है, इसलिए सार्वजनिक जीवन में संयम, मर्यादा और जिम्मेदारी का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से सकारात्मक राजनीति करने, धार्मिक भावनाओं का सम्मान बनाए रखने तथा विकास और जनकल्याण को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनता अब भावनात्मक नारों और राजनीतिक नाटकीयता से आगे बढ़ चुकी है तथा वही नेतृत्व स्वीकार करेगी जो ईमानदारी, संवेदनशीलता और जनसेवा के माध्यम से समाज का विश्वास जीतने का कार्य करेगा।

