कुरना में 20 वर्षों से चल रहा था कथित फर्जी इलाज का कारोबार, अब ग्रामीणों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग

कुरना में 20 वर्षों से चल रहा था कथित फर्जी इलाज का कारोबार, अब ग्रामीणों ने उठाई सख्त कार्रवाई की मांग


स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, बिना डिग्री इलाज करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच और गांव में स्थायी स्वास्थ्य सुविधा की मांग तेज
कांकेर। जिले के नरहरपुर विकासखंड के ग्राम कुरना से सामने आए एक मामले ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव में एक व्यक्ति पिछले लगभग 20 वर्षों से कथित रूप से बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री और पंजीकरण के लोगों का इलाज करता रहा। आरोप है कि गांव के अपने घर के एक कमरे में क्लिनिक संचालित कर मरीजों का उपचार किया जाता था, जहां आसपास के कई गांवों से भी लोग इलाज कराने पहुंचते थे। अब इस मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच, कानूनी कार्रवाई और गांव में नियमित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
यह उल्लेखनीय है कि इस मामले में संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी संबंधित विभाग द्वारा नहीं की गई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही तथ्यों की अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
घर के कमरे से संचालित होता था कथित क्लिनिक, वर्षों तक ग्रामीणों का बना भरोसा
ग्रामीणों के अनुसार ग्राम कुरना निवासी देवानंद विश्वकर्मा अपने घर के एक कमरे में वर्षों से मरीजों का इलाज करते रहे। बताया जाता है कि वहां किसी प्रकार का मेडिकल डिग्री संबंधी बोर्ड या पंजीकरण का विवरण प्रदर्शित नहीं था, फिर भी प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते थे। बुखार, सर्दी-खांसी, पेट दर्द, चोट, बुखार सहित सामान्य बीमारियों का उपचार किया जाता था तथा दवाइयां और इंजेक्शन भी लगाए जाते थे।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य केंद्र गांव से काफी दूर होने और समय पर वाहन सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण अधिकांश लोग मजबूरी में वहीं उपचार कराने जाते थे। कई लोगों ने बताया कि वर्षों से इलाज मिलने के कारण गांव में उन्हें “डॉक्टर साहब” के नाम से जाना जाने लगा था और धीरे-धीरे आसपास के चार से पांच गांवों के लोग भी वहां पहुंचने लगे।
स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बनी बड़ी वजह, मजबूरी में निजी इलाज पर निर्भर ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है। कई गांवों के लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। बरसात के मौसम में सड़क और परिवहन की स्थिति और अधिक कठिन हो जाती है। ऐसे में छोटी-मोटी बीमारियों के लिए लोग गांव में उपलब्ध किसी भी उपचार व्यवस्था पर निर्भर हो जाते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गांव में नियमित डॉक्टर, पर्याप्त दवाइयां और समय पर एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध होती, तो शायद लोगों को इस प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर नहीं होना पड़ता। ग्रामीणों ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव ही ऐसी परिस्थितियों को जन्म देता है।
कानूनी विशेषज्ञों ने जताई चिंता, बिना पंजीकरण इलाज करना गंभीर मामला
स्वास्थ्य कानून से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति बिना वैध मेडिकल डिग्री और आवश्यक पंजीकरण के चिकित्सा सेवा प्रदान करता है, तो यह गंभीर कानूनी विषय हो सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित कानूनों के तहत जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का भी कहना है कि बिना उचित प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जानकारी के दवाइयों का उपयोग, एंटीबायोटिक का गलत प्रयोग, स्टेरॉयड का अनियंत्रित इस्तेमाल या गलत मात्रा में दवा देना मरीजों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इससे संक्रमण बढ़ने, दवाओं के दुष्प्रभाव तथा किडनी और लीवर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से दो प्रमुख मांगें रखीं
मामले के सामने आने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग यह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाए तथा कथित अवैध क्लिनिक को बंद कराया जाए। दूसरी मांग यह है कि ग्राम कुरना और आसपास के गांवों में स्थायी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए, जिसमें नियमित चिकित्सक, आवश्यक दवाइयां, समय पर एम्बुलेंस सेवा और प्राथमिक उपचार की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल कार्रवाई कर देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवस्था मजबूत करनी होगी।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार, स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे बड़े सवाल
ग्रामीणों के अनुसार इस मामले को लेकर संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया है। खबर लिखे जाने तक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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