छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं पूर्व जनपद अध्यक्ष राजेंद्र पप्पू बंजारे ने शिक्षक दिवस पर बधाई देते हुए राष्ट्रीय शिक्षक दिवस की प्रासंगिकता को बताया कि देश में हर साल 5 सितंबर को टीचर्स डे मनाया जाता है। इस मौके पर स्कूलों में रंगारंग प्रोग्राम होते हैं। आधुनिक समय में स्टूडेंट्स इस खास दिन अपने टीचर्स को संदेश भेजकर या गिफ्ट देकर विश करते हैं।*
वर्ष 1962 से पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की जयंती 05 सितंबर को शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाता है।
महान शिक्षाविद डॉ. राधाकृष्णन जी का जन्म 5 सितंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुतनी ग्राम में हुआ था। आपके पिता सर्वपल्ली वीरास्वामी और माताजी का नाम सीतम्मा था। वर्ष 1903 में श्रीमती सिवाकामू के साथ उनका विवाह हुआ।
कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने आगे बताया कि डॉ. राधाकृष्णन जी ने 12 साल की उम्र में ही बाइबिल और स्वामी विवेकानंद के दर्शन का अध्ययन कर लिया था। दर्शनशास्त्र से एम.ए. करने के बाद 1916 में मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक अध्यापक के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई। उन्होंने 40 वर्षों तक शिक्षक के रूप में काम किया।
डॉ. राधाकृष्णन जी 1931-1936 तक आंध्र विश्वविद्यालय के कुलपति रहे।
1936-1939 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहे।
1939-1948 तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति रहे।
1952में भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति बने।
1953-1962 तक दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति रहे।
1954 में उन्हें ‘भारत रत्न’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।
ब्रिटिश शासनकाल में उन्हे ‘सर’ की उपाधि दी गई।
कांग्रेस प्रदेश सचिव राजेन्द्र बंजारे ने बताया कि1961 में इन्हें जर्मनी के पुस्तक प्रकाशन द्वारा ‘विश्व शांति पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया।
1962 में भारत के द्वितीय राष्ट्रपति बनाये गये।
डॉ. राधाकृष्णन जी का निधन 17 अप्रैल, 1975 को हो गया, लेकिन एक आदर्श शिक्षक और दार्शनिक के रूप में वह आज भी हमसभी के लिए प्रेरणादायक हैं। उनकी याद में राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक स्तर पर प्रत्येक वर्ष 05 सितम्बर को शिक्षकों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जाता है।
प्राचीनकाल से ही गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति का एक पवित्र हिस्सा रही है। राष्ट्रीय शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर अपने माता-पिता और शिक्षकों को सादर नमन एवं समस्त शिक्षको को ढेरों शुभकामनाएँ।

