रायपुर नगर निगम की नाक के नीचे दांव पर इंसानी जिंदगी: बिना सुरक्षा उपकरणों के गहरे गटर में उतरने को मजबूर सफाईकर्मी, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग(IHRPC)

रायपुर नगर निगम की नाक के नीचे दांव पर इंसानी जिंदगी: बिना सुरक्षा उपकरणों के गहरे गटर में उतरने को मजबूर सफाईकर्मी, अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग(IHRPC)

ने जताई गहरी नाराजगीरायपुर: राजधानी रायपुर के हृदय स्थल पर स्थित नगर निगम जोन क्रमांक 02 कार्यालय के ठीक सामने आज प्रशासनिक संवेदनहीनता और मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन का एक बेहद खौफनाक और विचलित करने वाला नजारा देखने को मिला। यहाँ चल रहे नाला सफाई कार्य के दौरान सफाईकर्मियों को बिना किसी बुनियादी सुरक्षा उपकरण, लाइफ जैकेट, मास्क या मलबे से सुरक्षा देने वाले जूतों (गमबूट) के ही गहरे और जहरीले गटर के भीतर उतार दिया गया। अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग ने इस लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया है।प्रदेश महासचिव प्रद्युम्न शर्मा ने आज मौके पर स्थिति का जायजा लेते हुए सीधे प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक और विडंबनापूर्ण है कि जिस सड़क से दिनभर जोन कमिश्नर, स्वास्थ्य अधिकारी और तमाम बड़े प्रशासनिक हुक्मरानों की गाड़ियां गुजरती हैं, ठीक उसी के सामने नगर निगम प्रशासन की नाक के नीचे सफाईकर्मियों की जान को इस तरह जोखिम में डाला जा रहा है। नाले के भीतर नुकीले कांच, लोहे के जंग लगे टुकड़े या जानलेवा विषैली गैसें हो सकती हैं, जिससे किसी भी पल उनकी जान जा सकती है या वे गंभीर रूप से अपंग हो सकते हैं। बिना जूतों के उन्हें दलदल जैसे गंदे नाले में धकेलना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवीय गरिमा का घोर हनन भी है।अभी कुछ ही दिनों पहले रायपुर के ही एक नामी-गिरामी निजी अस्पताल के परिसर में बने मेनहोल (गटर) की सफाई के दौरान इसी तरह की प्रशासनिक और प्रबंधकीय लापरवाही के कारण दो सफाईकर्मियों की दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई थी। उस हृदयविदारक घटना में दो हंसते-खेलते परिवार पूरी तरह तबाह हो गए और अपने अपनों से हमेशा के लिए बिछड़ गए। उस बड़ी त्रासदी के तत्काल बाद भी राजधानी के बीचों-बीच खुद सरकारी तंत्र द्वारा ऐसी जानलेवा लापरवाही को दोहराया जाना यह साबित करता है कि प्रशासन के लिए इन गरीब और मेहनतकश श्रमिकों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं है।प्रद्युम्न शर्मा ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि माननीय सुप्रीम कोर्ट और देश के कानून द्वारा ‘मैन्युअल स्कैवेंजिंग’ (हाथ से मैला ढोने और बिना सुरक्षा गटर में उतरने) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की शह पर इस नियम की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। उन्होंने मांग की है कि इस कार्य के लिए जिम्मेदार ठेकेदार, सुपरवाइजर तथा संबंधित स्वास्थ्य अधिकारी एवं जोन कमिश्नर पर तत्काल सख्त अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाए।अंतरराष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि रायपुर के भीतर चल रहे सभी सफाई कार्यों में आधुनिक मशीनों का उपयोग अनिवार्य किया जाए और यदि कहीं श्रमिकों की आवश्यकता हो, तो उन्हें उच्च स्तरीय पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE), ऑक्सीजन किट, गमबूट और रिफ्लेक्टर जैकेट अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराए जाएं। यदि भविष्य में सुरक्षा खामियों की वजह से कोई भी अनहोनी या जनहानि होती है, तो IHRPC सीधे संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और मानवाधिकार न्यायालय में मामला ले जाने के लिए बाध्य होगा।

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