नगर निगम रायपुर में भ्रष्टाचार और ‘दोहरी नीति’ के विरुद्ध IHRPC का हल्लाबोल: भ्रष्टों को संरक्षण और प्लेसमेंट कर्मचारियों का शोषण अब नहीं चलेगा


नगर निगम रायपुर में भ्रष्टाचार और ‘दोहरी नीति’ के विरुद्ध IHRPC का हल्लाबोल: भ्रष्टों को संरक्षण और प्लेसमेंट कर्मचारियों का शोषण अब नहीं चलेगा
रायपुर (छत्तीसगढ़) | दिनांक: 28 अप्रैल 2026
अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग (छत्तीसगढ़) ने नगर पालिक निगम रायपुर में व्याप्त प्रशासनिक भ्रष्टाचार और प्लेसमेंट कर्मचारियों के अधिकारों के हनन के विरुद्ध एक निर्णायक मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने आज महापौर और नेता प्रतिपक्ष को ज्ञापन सौंपकर निगम प्रशासन की “दोहरी नीति” को बेनकाब किया।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि एक ओर निगम प्रशासन करोड़ों रुपये के घोटालों (मियावाकी प्लांटेशन, फर्जी पद सृजन और नियम विरुद्ध नियुक्तियों) में लिप्त अधिकारियों को संरक्षण दे रहा है, वहीं दूसरी ओर निगम की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने वाले प्लेसमेंट कर्मचारियों को उनके बुनियादी श्रम अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि निगम अपने प्लेसमेंट कर्मचारियों की पूरी तरह अनदेखी कर रहा है , निगम के मेहनतकश कर्मचारी न्यूनतम वेतन, सुरक्षा और केंद्र सरकार की नई श्रम संहिताओं के लाभ के लिए दर-दर भटक रहे हैं तो वही दूसरी और ₹3 करोड़ के मियावाकी प्लांटेशन में पौधों की संख्या में भारी हेराफेरी और रसूखदारों की अवैध नियुक्तियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन की मिलीभगत को दर्शाता है।आज कल तो निगम में भ्रष्टाचार को दबाने के लिए आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारियों को “रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं” बताकर गायब किया जाने का ट्रेंड चल रहा है।
प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा है कि, “निगम प्रशासन यह न भूले कि प्लेसमेंट कर्मचारी भी समाज का हिस्सा हैं और उनका शोषण मानवाधिकारों का उल्लंघन है। यदि 15 दिनों के भीतर भ्रष्ट अधिकारियों का निलंबन और प्लेसमेंट कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों की बहाली नहीं की गई, तो हमें इसे लोकायुक्त छत्तीसगढ़ एवं अन्य वैधानिक मंचों पर विधिक रूप से उठाने हेतु बाध्य होना पड़ेगा ।”

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