रायपुर। राजधानी में अम्बेडकर जयंती के अवसर पर आयोजित “RAIPUR SINGING TALENT HUNT” ने एक अलग ही माहौल बना दिया, जहां संगीत, सामाजिक संदेश और उत्साह एक साथ नजर आया। कार्यक्रम की शुरुआत बुद्ध वंदना से हुई और इसके साथ ही पूरे आयोजन में एक सकारात्मक और ऊर्जावान वातावरण बन गया।
जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ा, मंच पर प्रतिभाओं का सिलसिला शुरू हुआ। एक के बाद एक प्रतिभागियों ने अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। खास बात यह रही कि पुराने बॉलीवुड गीतों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। हर गाने के बाद गूंजती तालियां इस बात का प्रमाण थीं कि दर्शक हर प्रस्तुति का दिल से आनंद ले रहे थे।निर्णायक मंडल ने पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के प्रदर्शन को गंभीरता से देखा और हर प्रस्तुति के बाद उन्हें जरूरी सुझाव भी दिए। जजों ने साफ तौर पर कहा कि फाइनल राउंड में केवल वही प्रतिभागी आगे बढ़ेंगे, जो हर पैमाने पर खरे उतरेंगे। उन्होंने प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें बिना किसी झिझक के अपनी कला प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के बीच-बीच में “जय भीम” के नारों से माहौल गूंजता रहा। बाबा साहेब आम्बेडकर के संघर्ष और उनके विचारों को याद करते हुए कई प्रस्तुतियों में सामाजिक समानता और संविधान के महत्व को भी दर्शाया गया। इससे कार्यक्रम केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक संदेश देने वाला मंच बन गया।फाइनल राउंड में विजेताओं की घोषणा की गई, जिसमें जगदीश भीमटे ने प्रथम, प्रदीप सहारे ने द्वितीय और चंद्रशेखर फुलझेले ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं तेजप्रकाश फेकर चौथे और जलदीप नायक पांचवें स्थान पर रहे। विशेष गायन के लिए संघर्ष रामटेके को सम्मानित किया गया, जबकि विशेष गायन सम्मान वीणा मारकण्डे को दिया गया। मंच संचालन मंजूषा माटे ने प्रभावशाली अंदाज में किया, जिससे कार्यक्रम पूरी तरह व्यवस्थित और आकर्षक बना रहा।कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि रायपुर में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही मंच की जरूरत है। इस आयोजन ने न केवल कलाकारों को अवसर दिया, बल्कि समाज में एक सकारात्मक ऊर्जा भी पैदा की।अम्बेडकर जयंती के अवसर पर 14 अप्रैल को भी माल्यार्पण और भव्य रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर यह आयोजन एक यादगार पहल के रूप में सामने आया, जिसने संगीत के साथ-साथ सामाजिक चेतना को भी मजबूत किया।

