रायपुर में इतिहास रचा गया: बाबा साहब की 21 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित, लोगों की मौजूदगी में गूंजा आंबेडकर चौक
रायपुर। राजधानी रायपुर ने आज एक ऐतिहासिक पल का साक्षी बनते हुए सामाजिक समरसता, और एकजुटता का अनूठा उदाहरण पेश किया। डॉ. भीमराव अंबेडकर की 21 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा का आंबेडकर चौक पर विधिवत स्थापना कार्य पूर्ण हुआ। इस अवसर पर बौद्ध समाज के उपासक-उपासिकाओं, नगर निगम की टीम, प्रशासनिक अधिकारियों और सैकड़ो क़ि संख्या में आम नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।प्रतिमा स्थापना को लेकर शहर में सुबह से ही उत्साह का माहौल था। जैसे-जैसे समय बीतता गया, आंबेडकर चौक पर जनसैलाब उमड़ता गया। युवाओं की भागीदारी इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत रही। युवा लगातार जय भीम के नारे लगाते रहे, जिससे पूरा क्षेत्र गूंज उठा। वहीं बुजुर्गों के चेहरों पर गर्व और संतोष साफ झलक रहा था, जबकि महिलाएं और बच्चे भी पूरे जोश के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।यह प्रतिमा न केवल रायपुर शहर की सबसे ऊंची प्रतिमा मानी जा रही है, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में भी इसे एक विशेष स्थान प्राप्त होने जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस भव्य प्रतिमा को भिलाई में तैयार किया गया था, जहां से इसे विशेष व्यवस्था के तहत देर रात लगभग 12 बजे रायपुर लाया गया। इसके बाद आज शासन-प्रशासन की देखरेख में क्रेन और आधुनिक तकनीकों की सहायता से प्रतिमा को स्थापित किया गया।प्रतिमा स्थापना के दौरान आंबेडकर चौक और आसपास के क्षेत्रों में उत्सव जैसा माहौल बना रहा। लोगों ने पटाखे फोड़कर अपनी खुशी का इजहार किया, वहीं एक-दूसरे को बधाइयां देकर इस ऐतिहासिक क्षण को यादगार बनाया। कई सामाजिक संगठनों और समाज के प्रमुख लोगों ने भी इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में समाज और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला, जिसने इस कार्य को सफल बनाने में अहम योगदान दिया।समाज के लोगों ने बताया कि यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि बाबा साहब के विचारों, उनके संघर्ष और उनके द्वारा दिए गए संविधानिक अधिकारों का प्रतीक है। इस प्रतिमा के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों और मूल्यों से प्रेरणा मिलेगी।अब इस भव्य प्रतिमा के लोकार्पण को लेकर भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। आगामी 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर इस प्रतिमा का विधिवत लोकार्पण किया जाएगा। इस अवसर पर शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और समाज के प्रमुख लोग शामिल होंगे। कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं।रायपुर में स्थापित यह विशाल प्रतिमा आने वाले समय में न केवल शहर की पहचान बनेगी, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और शिक्षा के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करेगी। यह दिन शहर के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है।

