25.02.2026 Raipur
रायपुर के उद्योगों में ‘खूनी खेल’: 2 साल में 42 से अधिक बड़े हादसे, विभाग मौन! सूचना के अधिकार से खुलासा: बजरंग पावर, जायसवाल निको और वंदना ग्लोबल जैसी इकाइयों में सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ीं। रायपुर: रायपुर संभाग के औद्योगिक क्षेत्रों (सिलतरा, उरला, धरसींवा) में श्रमिक सुरक्षा भगवान भरोसे है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संरक्षण आयोग ने सूचना के अधिकार से प्राप्त वर्ष 2024-2025 के आधिकारिक दस्तावेजों से औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग के दावों की पोल खोल दी है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि पिछले महज दो वर्षों में इन क्षेत्रों में 42 से अधिक गंभीर औद्योगिक दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें कई श्रमिकों ने अपनी जान गंवाई है और दर्जनों स्थायी रूप से अपंग हो गए हैं।मानवाधिकारों की बलि चढ़ रहे श्रमिक: प्रदेश महासचिव प्रद्युम्न शर्मा ने RTI के जरिए खोला रायपुर के उद्योगों का ‘डेथ रजिस्टर’:-आरटीआई दस्तावेजों के अनुसार, मेसर्स बजरंग पावर एण्ड इस्पात में सर्वाधिक 12 से अधिक दुर्घटनाएं हुई हैं। वहीं जायसवाल निको में 8 और वंदना ग्लोबल में 5 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन कंपनियों में एक ही तरह के हादसे (जैसे ऊंचाई से गिरना या फर्नेस विस्फोट) बार-बार हो रहे हैं, फिर भी विभाग ने केवल मामूली जुर्माना या कोर्ट केस कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है। औद्योगिक सुरक्षा विभाग और पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी इन फैक्ट्रियों का नियमित निरीक्षण करने के बजाय उन्हें संरक्षण दे रहे हैं। कारखाना अधिनियम 1948 की स्पष्ट धाराओं के उल्लंघन के बावजूद आज तक किसी भी ‘आदतन अपराधी’ फैक्ट्री पर तालाबंदी की कार्रवाई नहीं की गई है।प्रद्युम्न शर्मा का बड़ा सवाल: “जब राजधानी रायपुर का यह हाल है, तो पूरे प्रदेश के औद्योगिक जिलों की स्थिति कितनी भयावह होगी?” ये 42+ हादसे तो केवल रायपुर शहर और उसके आसपास के हैं। यदि छत्तीसगढ़ के अन्य औद्योगिक जिलों जैसे रायगढ़, कोरबा, जांजगीर-चांपा और दुर्ग-भिलाई के आंकड़े जोड़ दिए जाएं, तो यह संख्या सैकड़ों में होगी। जब राजधानी की नाक के नीचे प्रशासन इतना लापरवाह है, तो दूरस्थ जिलों में श्रमिकों की सुरक्षा की क्या स्थिति होगी, इसकी कल्पना भी डरावनी है।”औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने केवल कागजी कार्रवाई की, किसी भी फैक्ट्री का लाइसेंस रद्द नहीं हुआ। फैक्ट्रियों में मजदूरों को खतरे की जानकारी नहीं दी जाती और उन्हें बिना ट्रेनिंग के मौत के मुंह में झोंक दिया जाता है। यह हम नहीं, सरकारी दस्तावेज़ कह रहे हैं!”इस मामले को लेकर आज माननीय कैबिनेट मंत्री श्री लखन लाल देवांगन जी, संचालक औद्योगिक स्वस्थ्य एवं सुरक्षा विभाग को पत्र सौंपा गया है। यदि जल्द से जल्द दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और असुरक्षित फैक्ट्रियों को सील नहीं किया गया, तो यह मामला माननीय उच्च न्यायालय (बिलासपुर), राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय हरित अधिकरण ले जाया जाएगा।

