रायपुर प्रेस क्लब चुनाव: कलम बिकेगी या लड़ेगी? — पत्रकार बनाम सौदागर की निर्णायक जंग

रायपुर प्रेस क्लब चुनाव: कलम बिकेगी या लड़ेगी? — पत्रकार बनाम सौदागर की निर्णायक जंग

रायपुर।रायपुर प्रेस क्लब चुनाव को लेकर माहौल पूरी तरह गर्मा चुका है। वरिष्ठ पत्रकार सुनील नामदेव ने इस चुनाव को लेकर ऐसा आक्रामक और फ्रंटल रुख अपनाया है, जिसने पूरे पत्रकार समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह चुनाव किसी पद, प्रतिष्ठा या आयोजन समिति का नहीं, बल्कि पत्रकारिता की आत्मा, स्वतंत्रता और अस्तित्व को बचाने की लड़ाई है।सुनील नामदेव ने कहा कि रायपुर प्रेस क्लब कभी पत्रकारों के संघर्ष, सुरक्षा और सामूहिक आवाज़ का सबसे मजबूत मंच हुआ करता था, लेकिन बीते कुछ वर्षों में यह संस्था राजनीतिक प्रभाव, सत्ता-समीकरण और निजी स्वार्थों की गिरफ्त में जाती चली गई। परिणाम यह हुआ कि प्रेस क्लब संघर्ष के केंद्र से हटकर समारोह, फोटो सेशन और चाय-चर्चा तक सिमट कर रह गया।उन्होंने कहा कि जब पत्रकारों पर झूठे मुकदमे दर्ज हुए, जब खबर लिखने पर धमकियाँ मिलीं, जब थाने, कोर्ट और जेल के चक्कर काटने पड़े—तब प्रेस क्लब की भूमिका मूक दर्शक जैसी रही। यही चुप्पी आज पत्रकार समाज के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी है।सुनील नामदेव ने दो टूक कहा कि प्रेस क्लब सत्ता का पिछलग्गू बनने के लिए नहीं, बल्कि सत्ता से सवाल पूछने वाले पत्रकारों की ढाल बनने के लिए बना था। अगर आज भी सत्ता की नज़दीकी को योग्यता माना गया, तो आने वाले समय में सच्ची पत्रकारिता करना अपराध बन जाएगा और हर पत्रकार को अकेले लड़ने के लिए छोड़ दिया जाएगा।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह चुनाव किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि एक पूरी प्रवृत्ति के खिलाफ जनमत संग्रह है। यह लड़ाई है—पत्रकार बनाम पत्रकारिता के सौदागर,संघर्ष बनाम समझौता,और स्वतंत्रता बनाम सत्ता की गुलामी के बीच।वरिष्ठ पत्रकार ने पत्रकार साथियों से अपील नहीं, बल्कि चेतावनी भरे आह्वान के साथ कहा कि इस बार वोट देते समय चेहरे, नारों और बड़े-बड़े वादों से सावधान रहें। असली कसौटी यह होनी चाहिए कि संकट के समय कौन पत्रकार के साथ खड़ा रहा और कौन सत्ता के सामने खामोश रहा।उन्होंने कहा कि अगर आज पत्रकारों ने गलत फैसला किया, तो कल जब खबर लिखने पर दबाव पड़ेगा, फर्जी मुकदमे होंगे और संस्थान खामोश रहेगा, तब किसी को दोष देने का अधिकार नहीं रहेगा। प्रेस क्लब की चुप्पी दरअसल पत्रकार समाज की हार होगी।सुनील नामदेव ने कहा कि वोट भले ही व्यक्तिगत अधिकार हो, लेकिन उसका असर पूरे पत्रकार समाज पर पड़ता है। यही कारण है कि इस चुनाव में लिया गया निर्णय आने वाले वर्षों की पत्रकारिता की दिशा तय करेगा।अंत में उन्होंने साफ शब्दों में कहा—अब वक्त आ गया है कि प्रेस क्लब में पत्रकार चुने जाएँ, पत्रकारिता के सौदागर नहीं।यह चुनाव इतिहास बनाएगा कि रायपुर का पत्रकार समाज सत्ता के आगे झुका या कलम की ताकत के साथ खड़ा रहा।

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