*धर्म-राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान को नमन; हजारों ने उठाया लाभ, सेवादारों ने सुनाई अमर गाथा*
*बेमेतरा। गुरु गोबिंद सिंघ चौक में सिक्ख समाज, समूह साध संगत ने चार साहिबजादों की शहादत सप्ताह पर गरम दूध का लंगर लगाकर मानव सेवा का अनुपम उदाहरण पेश किया। यह लंगर न केवल सेवा का प्रतीक है, बल्कि गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान को श्रद्धांजलि भी।**हजारों नागरिकों ने इसका लाभ उठाया, जबकि सेवादारों ने सरहिंद की उस ऐतिहासिक घटना की गाथा सुनाई जब मोतीराम मेहरा ने ठंड में बच्चों को दूध पिलाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।*
*विवरण:: शहादत सप्ताह के इस आयोजन में हरजीत सिंघ खनूजा, वरिष्ठ इंदर सिंघ दत्ता, जगजीत सिंघ पप्पी अजमानी, प्रीतम हुरा, वरिंदर सिंघ सलूजा, हरभजन सिंघ खनूजा,राम छाबड़ा, हरदीप सिंघ राजा छाबड़ा, राहुल खनूजा,यश सिंघ सलूजा, सौरभ सलूजा, भवदीप सिंघ हुरा, राजा सचदेव, मंजीत अजमानी सहित अनेक सेवादारों ने सेवा की।**हजारों नागरिकों ने इसका लाभ उठाया, सिक्ख समाज के वरिष्ठ हरजीत सिंघ खनूजा ने सरहिंद की उस ऐतिहासिक घटना की गाथा सुनाई जब मोतीराम मेहरा ने ठंड में बच्चों को दूध पिलाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।*
*22 दिसंबर 1704 को चमकौर में अजीत सिंह व जुझार सिंह, तथा 27 दिसंबर को सरहिंद में जोरावर सिंह व फतेह सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए प्राण त्यागे। यह लंगर हरवर्ष देश-विदेश में लगाया जाता है।*
*बेमेतरा। गुरु गोबिंद सिंघ चौक में सिक्ख समाज, समूह साध संगत ने चार साहिबजादों की शहादत सप्ताह पर गरम दूध का लंगर लगाकर मानव सेवा का अनुपम उदाहरण पेश किया। यह लंगर न केवल सेवा का प्रतीक है, बल्कि गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादों के बलिदान को श्रद्धांजलि भी।**हजारों नागरिकों ने इसका लाभ उठाया, जबकि सेवादारों ने सरहिंद की उस ऐतिहासिक घटना की गाथा सुनाई जब मोतीराम मेहरा ने ठंड में बच्चों को दूध पिलाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।*
*विवरण:: शहादत सप्ताह के इस आयोजन में हरजीत सिंघ खनूजा, वरिष्ठ इंदर सिंघ दत्ता, जगजीत सिंघ पप्पी अजमानी, प्रीतम हुरा, वरिंदर सिंघ सलूजा, हरभजन सिंघ खनूजा,राम छाबड़ा, हरदीप सिंघ राजा छाबड़ा, राहुल खनूजा,यश सिंघ सलूजा, सौरभ सलूजा, भवदीप सिंघ हुरा, राजा सचदेव, मंजीत अजमानी सहित अनेक सेवादारों ने सेवा की।**हजारों नागरिकों ने इसका लाभ उठाया, सिक्ख समाज के वरिष्ठ हरजीत सिंघ खनूजा ने सरहिंद की उस ऐतिहासिक घटना की गाथा सुनाई जब मोतीराम मेहरा ने ठंड में बच्चों को दूध पिलाने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया।*
*22 दिसंबर 1704 को चमकौर में अजीत सिंह व जुझार सिंह, तथा 27 दिसंबर को सरहिंद में जोरावर सिंह व फतेह सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए प्राण त्यागे। यह लंगर हरवर्ष देश-विदेश में लगाया जाता है।*

