अखंड क्षत्रिय मर्यादा पर सवाल उठाने वाली महिला पर बवाल

अखंड क्षत्रिय मर्यादा पर सवाल उठाने वाली महिला पर बवाल


छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति का अपमान करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग तेज
कांकेर/रायपुर। क्षत्रिय समाज की मर्यादा, आदर्श और नैतिक परंपराओं को लेकर सोशल मीडिया में आए एक वीडियो ने प्रदेश में नई बहस खड़ी कर दी है। खुद को क्षत्रिय बताने वाली एक महिला द्वारा छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति, गृह मंत्री विजय शर्मा तथा पुलिस विभाग के प्रति कथित रूप से अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर विभिन्न सामाजिक संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। वीडियो में महिला द्वारा क्षत्रिय पहचान और भगवान श्री राम के वंशज होने का दावा करते हुए विवादित बातें कहने को समाज के लोगों ने क्षत्रिय परंपरा और न्यायप्रियता का अपमान बताया है।
क्षत्रिय समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि क्षत्रिय धर्म हमेशा न्याय, मर्यादा और सत्य के साथ खड़ा होता है। भगवान श्री राम को क्षत्रिय मर्यादा का प्रतीक बताते हुए समाजजनों ने कहा कि इतिहास में कभी भी क्षत्रिय समाज ने अधर्म का साथ नहीं दिया। ऐसे में वीडियो में दिखाई दे रही महिला द्वारा खुद को क्षत्रिय बताते हुए अभद्रता करना समाज की मान्यताओं के विपरीत है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि महिला की वेशभूषा, चाल-ढाल और भाषा मर्यादा से दूर है, जिससे लगता नहीं कि वह क्षत्रिय परंपरा की प्रतिनिधि है। समाजजनों ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माताएं-बहनें सम्मान और संस्कारों की पहचान होती हैं, ऐसे में किसी भी महिला द्वारा शराब के नशे में या असभ्य भाषा में प्रदेश की महिलाओं को नीचा दिखाने का प्रयास अस्वीकार्य है।
इस मुद्दे पर अखिल भारतीय हिंदू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष आलोक पांडे, प्रदेश संगठन महामंत्री गणेश तिवारी और प्रदेश महामंत्री उत्कर्ष गढ़ेवाल ने संयुक्त बयान जारी कर राज्य सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि उक्त महिला ने न केवल छत्तीसगढ़ की महिलाओं और समाज के सम्मान को ठेस पहुंचाई है, बल्कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री के साथ-साथ पुलिस विभाग पर भी बेहद अशोभनीय टिप्पणी की है। परिषद पदाधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की भाषा सामाजिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
परिषद पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि वीडियो में दिखाई दे रही महिला का व्यवहार क्षत्रिय समाज की आदर्श स्त्री-छवि से बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि क्षत्रिय समाज की महिलाएं मर्यादा, संयम और सादगी की प्रतिमूर्ति होती हैं। वे बिना कारण घर से बाहर नहीं निकलतीं, और जब भी सार्वजनिक रूप से आती हैं तो मर्यादा एवं सम्मान के साथ बोलती हैं। उनका कहना है कि वीडियो में दिख रही महिला का आचरण न तो क्षत्रिय संस्कृति का प्रतिनिधित्व करता है और न ही समाज की परंपराओं के अनुरूप है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह महिला संभवतः किसी के कहने पर हायर की गई है ताकि छत्तीसगढ़ के गढ़िया और मनुवादी होने जैसे अपमानजनक शब्दों का उपयोग कर समाज को बदनाम किया जा सके।
परिषद के नेताओं ने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि महिला ने पत्रकार आभा ठाकुर के साथ भी कथित रूप से गलत व्यवहार किया है, जो लोकतांत्रिक और नैतिक मूल्यों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और किसी पत्रकार के साथ अपमानजनक भाषा का उपयोग करना गंभीर अपराध है।
नेताओं ने यह चेतावनी भी दी कि अगर सरकार इस महिला के खिलाफ तुरंत और कठोर कार्रवाई नहीं करती है, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के सम्मान को ठेस पहुंचाने वालों को बख्शा नहीं जा सकता और समाज संगठित होकर इसका जवाब देगा।

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