छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के नायक शहीद विद्याचरण शुक्ल को दी श्रद्धांजलि
राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ पर शुक्ल भवन में हुई विचार गोष्ठी — 1 नवम्बर को पुष्पांजलि व 2026 में वृहद सम्मेलन का निर्णय
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में पृथक छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण आंदोलन के अग्रणी नेता एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शहीद श्री विद्याचरण शुक्ल के अमूल्य योगदान को स्मरण करते हुए एक विचार गोष्ठी का आयोजन 31 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे, शुक्ल भवन, बूढ़ापारा में किया गया।
कार्यक्रम में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं, आंदोलनकारियों एवं बुद्धिजीवियों ने शहीद श्री विद्याचरण शुक्ल की स्मृतियों को नमन करते हुए उनके योगदान को नए सिरे से रेखांकित किया।
“विद्याचरण शुक्ल और रविशंकर शुक्ल — छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के आधारस्तंभ” : अमितेष शुक्ल
विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री अमितेष शुक्ल ने कहा कि पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की परिकल्पना और इसकी वास्तविकता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं अविभाजित मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पं. रविशंकर शुक्ल तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री शहीद श्री विद्याचरण शुक्ल की दूरदृष्टि का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि जब बस्तर को आंध्रप्रदेश में मिलाने की कवायद चल रही थी, तब पं. रविशंकर शुक्ल के प्रखर विरोध के कारण ही वह मध्यप्रदेश का हिस्सा बना रहा — और यही भविष्य में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण की नींव बनी।
अमितेष शुक्ल ने बताया कि शहीद श्री विद्याचरण शुक्ल ने जनभावनाओं को स्वर देते हुए ‘छत्तीसगढ़ संघर्ष मोर्चा’ का गठन किया, जिसके माध्यम से रायपुर, दुर्ग, महासमुंद सहित विभिन्न जिलों में जेल भरो आंदोलन, छत्तीसगढ़ महाबंद जैसे ऐतिहासिक अभियानों का नेतृत्व किया गया।
उनके नेतृत्व में दिल्ली में विशेष ट्रेन द्वारा पहुँचे 10 हजार से अधिक आंदोलनकारियों ने संसद का घेराव किया। आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज, जल बौछार एवं अश्रुगैस का प्रयोग हुआ, जिसमें सैकड़ों लोग घायल हुए, किंतु सभी ने निर्भीकता से गिरफ्तारी दी।
“राज्य की वर्षगांठ में असली नायकों को याद किया जाना चाहिए”
पूर्व मंत्री ने वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा सरकार छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती तो धूमधाम से मना रही है, लेकिन जिन्होंने राज्य निर्माण के लिए संघर्ष किया — उन शहीदों, नेताओं और आंदोलनकारियों को विस्मृत किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक अन्याय है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।
संघर्ष की यादें और आने वाले आयोजन
परिषद के महामंत्री रामअवतार देवांगन ने अपने संबोधन में संघर्ष मोर्चा की नींव रखने और आंदोलन की उस कठिन यात्रा को साझा किया जब राज्य की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चुनौतीपूर्ण था।
गोष्ठी में उपस्थित अन्य वक्ताओं — अखिल भारतीय हिन्दू परिषद के प्रदेश अध्यक्ष आलोक पांडे, संगठन महामंत्री गणेश तिवारी,नितिन कुमार झा, चन्द्रशेखर शुक्ला, सलाम रिजवी, बीरेश शुक्ला, डॉ. उदयभान सिंह चौहान, कोरमा राव भिलाई, मनोज ठाकुर, संजय मिश्रा (अभनपुर), आभा मरकाम, शिरीष अवस्थी, विकास गुप्ता, चौलेश्वर चन्द्राकर, अनुभवचरण शुक्ल, गंगा यादव, पुष्पेंद्र परिहार, रवि शर्मा, राहुल शुक्ला आदि — ने भी अपने अनुभव साझा किए।
आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय
गोष्ठी के अंत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 1 नवम्बर को प्रातः 10 बजे श्री विद्याचरण शुक्ल उद्यान में विद्या भैया की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी।साथ ही, आगामी 21 जनवरी 2026 को वृहद प्रादेशिक कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्य निर्माण आंदोलन के सहभागी, जनप्रतिनिधि और युवा वर्ग को जोड़ा जाएगा।
संचालन और आभार
कार्यक्रम का संचालन चौलेश्वर चन्द्राकर ने किया आभार प्रदर्शन अनुभवचरण शुक्ल ने किया।कार्यक्रम की जानकारी प्रवक्ता नितिन कुमार झा द्वारा दी गई।

