शासन आदेश की अवहेलना एवं 26 अनुकम्पा नियुक्तियों में गंभीर अनियमितताओं पर मानवाधिकार आयोग ने उठाई आवाज़अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण आयोग (IHRPC) के प्रदेश महासचिव प्रदुमन शर्मा ने उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव को ज्ञापन सौंपते हुए नगर निगम रायपुर में हुई 26 अनुकम्पा नियुक्तियों में हुई गंभीर अनियमितताओं की स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।श्री शर्मा ने कहा कि दिनांक 16.09.2025 को जारी आदेश क्रमांक 1064/सा.प्र.वि./2025 में कई नियुक्तियाँ नियमों के प्रतिकूल की गईं। इनमें एक पार्षद एवं दो नाबालिग व्यक्तियों को भी नियुक्त किया गया है, जो कि छ.ग. सिविल सेवा (अनुकम्पा नियुक्ति) नियम 2012 का सीधा उल्लंघन है।आयोग ने यह भी बताया कि उक्त नियुक्तियों में – • हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति बन गई है क्योंकि संबंधित पार्षद का नाम भी चयन सूची में सम्मिलित है। • कुछ आवेदकों की आयु 18 वर्ष पूर्ण न होने पर भी उन्हें पात्र माना गया। • नियुक्ति आदेश मुख्य सचिवालय की प्रक्रिया से गुज़रे बिना, सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी कर दिए गए।इसके अलावा, “कारण बताओ सूचना” जारी कर खानापूर्ति करने की कार्यवाही को न्यायसंगत प्रक्रिया का उल्लंघन बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मामला न केवल सेवा नियमों के विपरीत है बल्कि शासन की पारदर्शिता नीति और सदाचार सिद्धांतों का भी उल्लंघन है।आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि – • बिना परीक्षण या सत्यापन के नियुक्ति आदेश जारी किए गए। • सामान्य प्रशासन विभाग एवं वित्त विभाग से अनुमति नहीं ली गई।
आयोग की प्रमुख मांगें: 1. पूरे प्रकरण की स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। 2. संबंधित अधिकारियों एवं विभागीय प्रमुखों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। 3. सभी विवादित नियुक्तियों को तत्काल निरस्त (Cancel) किया जाए। 4. जांच प्रतिवेदन को सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
अंत में, श्री प्रदुमन शर्मा ने कहा कि नगर निगम जैसी स्थानीय निकायों को संविधान के अनुच्छेद 243W के अंतर्गत जनता के प्रति जवाबदेह रहना चाहिए। शासन को चाहिए कि वह इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करे ताकि लोक प्रशासन में विश्वास एवं पारदर्शिता बनी रहे।

