अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ.सुनील किरण ने मिडिया के माध्यम कहा कि आज अमृतकाल हर सरकारी विभाग में हमेशा की तरह चल रहा है समय पर काम पूरा करने के लिए रिश्वत देनी पड़ेगी सरकार किसी की भी हो वास्तव में कोई फर्क नहीं पड़ता सरकार चाहे जितना प्रयास कर ले ये सरकारी अधिकारी कर्मचारी भ्रष्टाचार से नाता नहीं तोड़ना चाहते अब 5 लाख की रिश्वत लेते NTPC के उप महा प्रबंधक विजय दुबे गिरफ्तार किए गए है। इनको दिनांक 16.9.25 को ACB इकाई बिलासपुर ने रायगढ़ जिले के घरघोड़ा में NTPC तिलाईपाली कार्यालय रायकेरा में गोमती पेट्रोल पंप के पास अपनी वाहन में 4.50 लाख रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ने में सफलता हासिल हुई। इन्होंने जमीन अधिग्रहण किसानों से उनके ही अधिग्रहण भूमि पर मुआवजा राशि जारी करने के लिए पांच लाख रुपए मांगे थे और पूर्व में पचास हजार रिश्वत ले चुके थे। मतलब साफ़ है कोई भी नौकरी में तनख्वाह से पेट भरने नहीं आ रहा है। बल्कि उसे घूस की रकम चाहिये। आज के समय में NTPC के 50 फीसदी अधिकारी, कर्मचारी ऐसे ही किया करते होंगे किसानों से उनकी उपजाऊ भूमि अधिग्रहण कर कभी मुआवजा राशि के नाम पर कभी नौकरियों के नाम पर अफ़सर जब उसकी फ़ाइल लटकाता है तब जिसका काम होता है वह जुगाड़ से पैसे का आफ़र करता है और काम हो जाता है। जिस देश में FIR लिखवाने के लिये घूस और कोर्ट में तारीख़ लेने के लिये भी घूस और अपनी जमीन का मुआवजा और नौकरी लेने के लिये भी घूस लगती है उसके बारे में क्या कहा जाय। आदमी को हर दफ्तर में रिश्वत क्यों देनी पड़ती है.? जिसका उदहारण NTPC की ये घटना है जहां पर विजिलेंस जैसे शक्तिशाली भ्रष्टाचार विरोधी गतिविधियों को रोकने के लिए अलग से विभाग है सतर्कता कमीशन ईमानदारी से काम कर रहे है तो फिर घोटाले और बेईमानी कैसे बढ़ते जा रहे है क्या सरकार का भ्रष्टाचार रोकने का वादा सिर्फ़ सियासी नारा था सबसे ज़्यादा घूस सरकारी विभाग मे ही देना पड़ता है, किसी भी काम को करवाने के लिए हमको तो लगता है चारों तरफ भ्रष्टाचार फैला हुआ है। सरकार के दावों के बावजूद आम आदमी को रिश्वत देनी पड़ती है। सिस्टम में खामियों के कारण घोटाले और बेईमानी बढ़ती जा रही है। आरोपी NTPC अधिकारी उप महा प्रबंधक विजय दुबे इससे पहले NTPC सीपत में कार्यरत था डॉ.सुनील किरण ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय राज्य जाँच एजेंसियों से मांग किया है कि इनके कार्यकाल में हुए कार्यों की भी विजिलेंस द्वारा जाँच पड़ताल होनी चाहिए क्योंकि ये पहले NTPC सीपत के CSR विभाग में थे और प्रभावित 8 गांवों की विकास की जिम्मेदारी भी इनको ही थी जो विकास सभी प्रभावित गांवों में आंखों से दिखाई नहीं देता है नाली, सड़क, स्कूल, सार्वजनिक मंच, सोलर लाइट, सार्वजनिक शौचालय, CSR मत से वितरण किये गए पंचायतों को सामग्री, वृक्षारोपण और तालाब सौंफ़रिकरण के नाम पर NTPC ने करोड़ों रुपए खर्च किया है CSR विभाग के द्वारा लेकिन सभी कार्य गुणवत्तापूर्ण नहीं किये गए है जिससे आम आदमी को कठिनाई का सामना करना पड़ता है और सरकारी धन का दुरूपयोग किया गया है अपने निजी लाभ के लिए पद का दुरूपयोग किया जाता है और क्षेत्र को सुविधाओं से वंचित किया है।
*बिलासपुर एंटी करप्शन ब्यूरो की बड़ी कार्रवाई, NTPC का डिप्टी GM विजय दुबे चार लाख का घुस लेते गिरफ्तार*

