नवरात्रि गरबा महोत्सव में विकृत फैशन पर लगेगा प्रतिबंध
अखिल भारतीय हिंदू परिषद छत्तीसगढ़ ने गरिमा बचाने की अपील, समितियों को जारी की चेतावनी
कांकेर।नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना और भक्ति का प्रतीक है। यह पर्व समाज को श्रद्धा, संस्कार और भक्ति से जोड़ने का संदेश देता है। किंतु हाल के वर्षों में गरबा आयोजनों के दौरान फैशन और दिखावे की ऐसी प्रवृत्तियाँ बढ़ रही हैं, जो धार्मिक वातावरण की पवित्रता को प्रभावित कर रही हैं। इसी को देखते हुए अखिल भारतीय हिंदू परिषद छत्तीसगढ़ ने गरबा आयोजन समितियों एवं धर्मप्रेमियों से एक विशेष अपील और चेतावनी जारी की है।
परिषद ने साफ शब्दों में कहा है कि नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबों में ऐसे व्यक्तियों या महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए जो विकृत फैशन या अनुचित परिधानों के माध्यम से धार्मिक गरिमा को आहत करते हैं। परिषद का कहना है कि मंदिर परिसर और गरबा स्थल पर छोटी-छोटी कन्याएं पूजा और दर्शन के लिए आती हैं, और उन पर इस तरह की प्रवृत्तियों का गलत प्रभाव पड़ सकता है।
“गरबा मां की आराधना के लिए होता है, न कि लोगों को खुश करने या फैशन प्रदर्शन का मंच बनने के लिए। कोई इन लोगों को यह बात समझाए।” परिषद के पदाधिकारियों ने यह स्पष्ट संदेश दिया।
इस अपील पर हस्ताक्षर करने वाले पदाधिकारियों में
* आलोक पाण्डेय, प्रदेश अध्यक्ष, अखिल भारतीय हिंदू परिषद छत्तीसगढ़* गणेश तिवारी, प्रदेश संगठन महामंत्री* उत्कर्ष सिंह गरेवाल, प्रदेश मंत्री एवं बिलासपुर संभाग प्रभारी* तापस बोस, जिला अध्यक्ष, कांकेर
शामिल हैं।
परिषद ने कहा है कि नवरात्रि का पर्व केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं बल्कि सनातन धर्म की आस्था और गरिमा का प्रतीक है। इसलिए हर समिति को चाहिए कि गरबा आयोजन के दौरान नियमों का पालन करवाए और धार्मिक वातावरण को भक्ति और मर्यादा से परिपूर्ण बनाए।

