रायपुर में चला अनोखा स्वच्छता अभियान – युवाओं की टोली ने दिखाया “माता का प्रेम” का असर, विधायक और पार्षद ने की सराहना

रायपुर में चला अनोखा स्वच्छता अभियान – युवाओं की टोली ने दिखाया “माता का प्रेम” का असर, विधायक और पार्षद ने की सराहना


रायपुर। राजधानी रायपुर के अमलीडीह जोन क्रमांक 10 में रविवार को कुछ अलग ही नज़ारा देखने को मिला। वर्ल्ड मिशन सोसाइटी चर्च ऑफ गॉड के ASEZ WAO युवा वालंटियर ग्रुप ने हाथों में झाड़ू थामे और दिल में सेवा का जज़्बा लिए सफाई अभियान चलाया। सुबह 11 बजे शुरू हुए इस विशेष स्वच्छता अभियान में बड़ी संख्या में युवा जुड़े और देखते ही देखते इलाके की तस्वीर बदल दी।
ASEZ WAO वालंटियर्स का कहना है कि इस अभियान की असली प्रेरणा “माता का प्रेम” है, जिसके चलते वे निस्वार्थ भाव से समाज की भलाई के लिए आगे आते हैं। वालंटियर्स सिर्फ सफाई नहीं करते, बल्कि सेवा और ज़िम्मेदारी का बीज भी बोते हैं – ताकि हर कोई समझ सके कि स्वच्छता सिर्फ नगर निगम की नहीं, बल्कि हम सबकी ज़िम्मेदारी है।
इस मौके पर ग्रामीण विधायक मोतीलाल साहू भी पहुँचे और युवाओं की तारीफ़ करते हुए बोले, “प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान एक जन आंदोलन बन चुका है। ऐसे संगठनों की सक्रिय भागीदारी समाज को नई दिशा देती है।” वहीं, पार्षद व जोन अध्यक्ष सचिन मेघानी ने कहा, “अगर माताएँ, बहनें और बालिकाएँ भी जुड़ेंगी, तो सिर्फ स्वच्छ भारत ही नहीं, बल्कि स्वस्थ समाज भी बनेगा। रायपुर को स्वच्छता की रेस में नंबर वन बनाना हम सबके हाथ में है।”
कौन हैं ASEZ WAO?वर्ल्ड मिशन सोसाइटी चर्च ऑफ गॉड का वैश्विक स्वयंसेवी ग्रुप ASEZ WAO का मतलब है “आइए हम एक परिवार बनें और दुनिया को शुरू से अंत तक बचाएं”। यह ग्रुप युवा पेशेवरों से मिलकर बना है, जो “माता का हृदय” धारण कर पर्यावरण संरक्षण और समाज सेवा की दिशा में काम करता है। वे अपने “टेक एक्शन प्रोजेक्ट (TAP)” के ज़रिए जागरूकता फैलाकर स्थायी बदलाव की ओर बढ़ते हैं।
1964 में दक्षिण कोरिया में स्थापित चर्च ऑफ गॉड का मिशन नई वाचा का प्रचार और दुनिया भर के लोगों को पिता परमेश्वर व माता परमेश्वर की शिक्षा से जोड़ना है। इसी चर्च का एक अन्य स्वयंसेवी ग्रुप ASEZ विश्वविद्यालय के छात्रों के साथ मिलकर “SAVE” आंदोलन चलाता है, ताकि युवा भी समाज सुधार में सक्रिय भूमिका निभाएँ।
अमलीडीह में चला यह स्वच्छता अभियान सिर्फ सफाई तक सीमित नहीं रहा – इसने दिखा दिया कि जब दिल में सेवा और सोच में ज़िम्मेदारी हो, तो छोटे-छोटे कदम भी बड़े बदलाव की शुरुआत बन सकते हैं।

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