रेत के अवैध उत्खनन एवं भंडारण पर जनता को गुमराह करने के बजाये माफियाओ पर शक्ति से कार्यवाही करे। !
आरंग – प्रदेश में वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से रेत पर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सत्ता पक्ष एवँ विपक्ष इस मसले पर खूब एक दूसरे पर क्रिया प्रतिक्रिया देकर अवैध रेत उत्खनन परिवहन भंडारण पर डिबेट आरोप प्रत्यारोप बयान बाजी का जबरदस्त कार्यवाही चल रही हैं। प्रदेश में खनिज माफियाओं का आतंक इस कदर बड़ गई है कि पत्रकार जनप्रतिनिधि शासकीय कर्मचारी आम जनता सब पर भारी पड़ रही है। कहीं गोली चल रही है तो कहीं गाड़ी चड़ा दिया जा रहा हैं। तो कहीं बांद कर पीटने की शर्मनाक घटना सामने आई है। रेत पर बवाल के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के नेता पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े ने काफ़ी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शासन प्रशासन के कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। श्री जांगड़े ने खनिज विभाग की कार्यवाही को महज बयान बाजी खानापूर्ति एवं जनता को गुमराह करने वाली कार्यवाही करार दिया है। जांगड़े का आरोप है कि खनिज विभाग जिला प्रशासन एवं सत्ता पक्ष के नाक के नीचे समूचे प्रदेश में रेत का अवैध उत्खनन बिना रायल्टी पर्ची के उत्खनन परिवहन प्रतिबंध के उपरांत रात्रि में अवैध रेत खनन सहित डंके के चोट में खनिज माफिया शासन द्वारा निर्धारित दर से कई गुना अधिक दाम मे बिना रायल्टी पर्ची के रेत उत्खनन कर लोडिंग का दौर खुलेआम चलता रहा है। जिस कर मात्र खानापूर्ति के तौर पर अवैध परिवहन की कार्यवाही पूरे प्रदेश मे हुआ है। क्या बिना उत्खनन के खनिज परिवहन हो सकती है ? आरंग एवं अभनपुर के रेत खदानों के आस पास लाखो ट्रक रेत अवैध रूप से एवं वैध भंडारण लाइसेंस के आड़ में लाखो घन मीटर अवैध रूप से भंडार किया गया है। आरोप है की कई खनिज विभाग के अधिकारी के रिश्तेदार खनिज माफियाओ के साथ मिलकर पार्टनर शिप में भंडारण किया है। जिसके चलते कोई ठोस कार्यवाही अवैध भंडारणों में नहीं हो पाती है। खनिज विभाग को रेत के उत्खनन के महज 10 % रायल्टी भी प्राप्त नहीं होती है। बहरहाल खामियाजा प्रदेश के आम जनता को खनिज विभाग के लचर प्रदर्शन के कारण एवँ माफियाओ के सिंडिकेट के कारण सस्ती दाम के स्थान पर बहुत महगी दाम पर रेत खरीदना पड़ता है। जिसका प्रदेश के विकास पर भी बुरा असर पड़ रहा है। बारिस में रेत जमाखोरो के कारण सोने के दाम में रेत बिकती है। प्रदेश में आसमान छू रही है। रेत की कीमत जिसकी भनक क्या खनिज विभाग एवं जिला प्रशासन को नहीं है जो गंभीर मसला हैं। अभी खनिज विभाग एवं जिला प्रशासन कुंभकर्णीय नींद से जाग कर ताबड़ तोड़ रेत खदानों पर दबीस दे रहे हैं। आरंग अभनपुर के रेत खदानों के बाहर लाखो ट्रीप रेत के भंडार आम जनता को दिख रही हैं। लेकिन खनिज विभाग एवं जिला प्रशासन को नजर आ रही है की नहीं ?जो समय तय करेगी बहरहाल राज्य की विष्णु देव की भाजपा सरकार से श्री जांगड़े ने रेत के अवैध भंडारण पर की जा रही कार्यवाही निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से करने की मांग किया है। जिसको लेकर रेत के वैध एवं अवैध भंडारण की अनुमति के विरुद्ध मौके स्थल पर किये गये भंडारण का आँकलन (Asesment ) जिसमे मौके स्थल पर खनिज का भंडारण एवं अभिवहन पास की गड़ना रायल्टी पर्ची का विवरण उनके विरुद्ध मौके स्थल पर भंडारित खनिज की मात्रा की आकलन के विरुद्ध अधिक मात्रा में किये गये खनिज भंडार की जप्ती की कार्यवाही में पेनाल्टी के स्थान पर नीलामी की कार्यवाही अथवा परिवहन कर्ताओं को उक्त खनिज को शासन द्वारा निर्धारित दाम में लोडिंग किये जाने से माफियाओ की आतंक पर रोक लग सकती है। हर साल भंडारण पर नाम मात्र की कार्यवाही सुनने को मिलती है। जप्त खनिज को माफिया रातो रात बेच देती है। कार्यवाही मात्र कागजों बयानो तक सीमित होकर समय के अंधेरे में गुम हो जाती है।
आरंग – प्रदेश में वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से रेत पर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। सत्ता पक्ष एवँ विपक्ष इस मसले पर खूब एक दूसरे पर क्रिया प्रतिक्रिया देकर अवैध रेत उत्खनन परिवहन भंडारण पर डिबेट आरोप प्रत्यारोप बयान बाजी का जबरदस्त कार्यवाही चल रही हैं। प्रदेश में खनिज माफियाओं का आतंक इस कदर बड़ गई है कि पत्रकार जनप्रतिनिधि शासकीय कर्मचारी आम जनता सब पर भारी पड़ रही है। कहीं गोली चल रही है तो कहीं गाड़ी चड़ा दिया जा रहा हैं। तो कहीं बांद कर पीटने की शर्मनाक घटना सामने आई है। रेत पर बवाल के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के नेता पूर्व जिला पंचायत सदस्य परमानंद जांगड़े ने काफ़ी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए शासन प्रशासन के कार्यवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं। श्री जांगड़े ने खनिज विभाग की कार्यवाही को महज बयान बाजी खानापूर्ति एवं जनता को गुमराह करने वाली कार्यवाही करार दिया है। जांगड़े का आरोप है कि खनिज विभाग जिला प्रशासन एवं सत्ता पक्ष के नाक के नीचे समूचे प्रदेश में रेत का अवैध उत्खनन बिना रायल्टी पर्ची के उत्खनन परिवहन प्रतिबंध के उपरांत रात्रि में अवैध रेत खनन सहित डंके के चोट में खनिज माफिया शासन द्वारा निर्धारित दर से कई गुना अधिक दाम मे बिना रायल्टी पर्ची के रेत उत्खनन कर लोडिंग का दौर खुलेआम चलता रहा है। जिस कर मात्र खानापूर्ति के तौर पर अवैध परिवहन की कार्यवाही पूरे प्रदेश मे हुआ है। क्या बिना उत्खनन के खनिज परिवहन हो सकती है ? आरंग एवं अभनपुर के रेत खदानों के आस पास लाखो ट्रक रेत अवैध रूप से एवं वैध भंडारण लाइसेंस के आड़ में लाखो घन मीटर अवैध रूप से भंडार किया गया है। आरोप है की कई खनिज विभाग के अधिकारी के रिश्तेदार खनिज माफियाओ के साथ मिलकर पार्टनर शिप में भंडारण किया है। जिसके चलते कोई ठोस कार्यवाही अवैध भंडारणों में नहीं हो पाती है। खनिज विभाग को रेत के उत्खनन के महज 10 % रायल्टी भी प्राप्त नहीं होती है। बहरहाल खामियाजा प्रदेश के आम जनता को खनिज विभाग के लचर प्रदर्शन के कारण एवँ माफियाओ के सिंडिकेट के कारण सस्ती दाम के स्थान पर बहुत महगी दाम पर रेत खरीदना पड़ता है। जिसका प्रदेश के विकास पर भी बुरा असर पड़ रहा है। बारिस में रेत जमाखोरो के कारण सोने के दाम में रेत बिकती है। प्रदेश में आसमान छू रही है। रेत की कीमत जिसकी भनक क्या खनिज विभाग एवं जिला प्रशासन को नहीं है जो गंभीर मसला हैं। अभी खनिज विभाग एवं जिला प्रशासन कुंभकर्णीय नींद से जाग कर ताबड़ तोड़ रेत खदानों पर दबीस दे रहे हैं। आरंग अभनपुर के रेत खदानों के बाहर लाखो ट्रीप रेत के भंडार आम जनता को दिख रही हैं। लेकिन खनिज विभाग एवं जिला प्रशासन को नजर आ रही है की नहीं ?जो समय तय करेगी बहरहाल राज्य की विष्णु देव की भाजपा सरकार से श्री जांगड़े ने रेत के अवैध भंडारण पर की जा रही कार्यवाही निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से करने की मांग किया है। जिसको लेकर रेत के वैध एवं अवैध भंडारण की अनुमति के विरुद्ध मौके स्थल पर किये गये भंडारण का आँकलन (Asesment ) जिसमे मौके स्थल पर खनिज का भंडारण एवं अभिवहन पास की गड़ना रायल्टी पर्ची का विवरण उनके विरुद्ध मौके स्थल पर भंडारित खनिज की मात्रा की आकलन के विरुद्ध अधिक मात्रा में किये गये खनिज भंडार की जप्ती की कार्यवाही में पेनाल्टी के स्थान पर नीलामी की कार्यवाही अथवा परिवहन कर्ताओं को उक्त खनिज को शासन द्वारा निर्धारित दाम में लोडिंग किये जाने से माफियाओ की आतंक पर रोक लग सकती है। हर साल भंडारण पर नाम मात्र की कार्यवाही सुनने को मिलती है। जप्त खनिज को माफिया रातो रात बेच देती है। कार्यवाही मात्र कागजों बयानो तक सीमित होकर समय के अंधेरे में गुम हो जाती है।

