सामाजिक कार्यकर्त्ता पंकज दास की पहल का असर ,
अब राजधानी के थानों में नजर आने लगा विधिक सेवा प्राधिकरण का पोस्ट भले छोटा क्यों ना हो पहल तो हुई
विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987
इस कानून के तहत गरीबों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के योजना का लाभ दिया जाता है, जिसमें पहले पैरा लीगल वॉलिंटियर की नियुक्ति थाने में या अन्य जगहों पर की जाती है ।जिनका मुख्य उद्देश्य गरीबों को निशुल्क आमजनता को कानूनी सलाह और जरूरत पड़ने पर निशुल्क अधिवक्ता भी उपलब्ध कराना होता है , खासकर इनका मुख्य कार्य नाबालिक बच्चों या गुमशुदा बच्चों को उनके घर पर पहुंचाना एवं बाल श्रम को रोकना है
जिन लोगों के पास न्यायालय जाकर अपनी कानूनी समस्या को रखने के लिए धन नहीं हो, उन्हें विधिक सेवा प्राधिकरण के वॉलिंटियर द्वारा निशुल्क कानूनी सलाह देते है,अधिवक्ता भी उपलब्ध कराते हैं, जो गरीब रेखा के नीचे हैं महिला आदिवासी इन सब को भी निशुल्क कानून सलाह एवं हर प्रकार की सुविधा दिया जाता है । कानूनी मदद करना विधिक सहायता कहलाता है। कानूनी सहायता देना, विधिक समता के लिए बहुत आवश्यक तत्त्व है क्योंकि निर्धनता के कारण बहोत से लोग न्याय न प्राप्त कर पाए तो विधिक समता का कोई अर्थ नहीं है जिसके तहत लगभग सभी राज्यों मे हर थाने मे विधिक सहायता के तहत कानून के जानकारों को नियुक्त किया गया है जिनका कार्य सभी को उचित न्याय दिलाना व मदद करना है जिसके विपरीत लगभग थानो नियुक्तियां तो कर दी गई मगर कही कोई विधिक सहायता से जुड़े व्यक्ति देखने को नहीं मिलते जिसपर पंकज दास ने जोर देकर उच्चय अधिकारी व जिम्मेदारों से निरंतर संपर्क कर अवगत कराया जिसके फलस्वरूप अब थानो मे
विधिक सहायता के बोर्ड नाम नम्बर लगने लगे

