बारनवापारा :- अनुमति ली ही नहीं और बायसनों को ढूंढने ले आए दो कुमकी हाथी
महासमुंद स्थित बारनवापारा से
कोरिया स्थित गुरु घासीदास नेशनल पार्क में बायसनों को शिफ्ट करने की योजना अधर में लटकती नजर आ रही है, क्योंकि अधिकारियों के अनुसार इस योजना को करीब दो माह पहले ही ही शुरू हो जाना था। इस पूरे मामले को लेकर जब अयान न्यूज़ की टीम ने पड़ताल की तो पता चला कि 40 बायसन को पकड़कर गुरु घासीदास नेशनल पार्क में शिफ्ट करने की अनुमति वन विभाग के उच्चाधिकारियों से ली ही नहीं गई है। जबकि बायसन को ढूंढ़ने के लिए दो कुमकी हाथियों को दो माह पहले अंबिकापुर से लेकर आ चुके हैं।
अब प्रबंधक सिर्फ इन दोनों कुमकी हाथियों को खाना खिलाने के लिए सिर्फ पैसे ही खर्च कर रहा है। अब तक इन हाथियों को खाना खिलाने में कितने रुपये खर्च आ गए हैं अधिकारी इसे बताने की स्थिति में नहीं है। अब बायसनों इस तरह है योजना वन अधिकारियों के अनुसार बायसन को पकड़ने के लिए अंबिकापुर से दो कुमकी हाथियों को लाया गया है। इसके माध्यम से डाक्टरों की टीम हाथी पर सवार होकर बायसन को ढूंढना है। जैसे ही बायसन नजर आते है तो हाथी में ही बैठकर डाक्टरों द्वारा ट्रैक्युलाइज गन की गोली से बेहोश कर दिया जाएगा। फिर बेहोशी की हालत में डाक्टरों की टीम उसकी जांच करेंगे। स्वास्थ्य अच्छी होने की स्थिति में विशेष वाहन से गुरु घासीदास नेशनल पार्क (कोरिया) मे छोड़ने की प्लानिंग है।
बायसन पकड़ने की योजना फिलहाल रूकी हुई है। बेहोश करने के लिए आवश्यक दवाइयां आते ही शुरू हो जाएगी। बारनवापारा से 40परिवहन के लिए पैसे नहीं होने विदेश से नहीं ला रहे जानवर
जंगल सफारी प्रबंधक ने कुछ माह पहले जंगल सफारी में जेंद्रा, ओरिक्स, जैसे जानवरों को रखने के लिए चार करोड़ का बाड़ा बनाया है। इन जानवरों को साउथ आफ्रीका और इजराइल से लाना है। जब बाड़ा तैयार हुआ तो अधिकारियाँ। ने विदेश से लाने के लिए परिवहन का खर्च निकाला तब पता चला कि इनको लाने के लिए चार करोड़ रुपये खर्च होगे। ऐसे में एन वक्त में उच्चाधिकारी ने बजट नहीं होने का हवाला देकर इस योजना के लिए मना कर दिया।
बायसन को पकड़कर गुरु घासीदास नेशनल पार्क में शिफ्ट करना है। फ़ाइल फोटो संलग्न

