धर्म एवं आध्यात्म की पावन धरा शिवरीनारायण में मनाया गया आंवला नवमी का त्यौहार

धर्म एवं आध्यात्म की पावन धरा शिवरीनारायण में मनाया गया आंवला नवमी का त्यौहार*


चित्रोत्पला गंगा के पावन तट पर युग -युगांतर से विराजित भगवान शिवरीनारायण की पावन धारा में आंवला नवमी का त्यौहार परंपरागत रूप से मनाया गया श्री शिवरीनारायण मठ में यह आयोजन सायंकालीन बेला में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए महामंडलेश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज विशेष रूप से उपस्थित हुए। इस अवसर पर आंवला वृक्ष के नीचे भगवान श्री हरि की विशेष पूजा अर्चना की गई, आरती एवं स्तुति गान संपन्न होने की पश्चात सभी श्रद्धालु भक्तों ने आंवला नवमी का प्रसाद भगवान शिवरीनारायण की पावन धारा में प्राप्त किया। इसमें नगर की माताएं बड़ी संख्या में सम्मिलित हुई इस अवसर पर आंवला नवमी का महत्व प्रतिपादित करते हुए राजेश्री महन्त जी महाराज ने कहा कि- कार्तिक शुक्ल पक्ष नवमी को आंवला नवमी के रूप में मनाया जाता है, इसे अक्षय नवमी के नाम से भी जाना जाता है इस दिन किया गया पूजा- अर्चना, दान- पुण्य सभी अक्षय बना रहता है। भगवान श्री हरि की भक्ति की प्राप्ति होती है साधक को मोक्ष की प्राप्ति सुलभता से हो जाती है। इस अवसर पर विशेष रूप से जगदीश मंदिर के पुजारी श्री त्यागी जी महाराज, मुख्तियार सुखराम दास जी, बृजेश केशरवानी,पूर्णेन्द्र तिवारी, वीरेन्द्र तिवारी, योगेश शर्मा निरंजन लाल अग्रवाल, सुबोध शुक्ला, कमलेश सिंह, हर प्रसाद साहू, हेमंत दुबे,देवालाल सोनी, गोपाल अग्रवाल, प्रमोद सिंह, लक्ष्मी सिंह चंदेल,ज्ञानेश शर्मा, सतीश साहू, रामखिलावन तिवारी, जगदीश यादव, भूपेंद्र पांडे,संतोष साहू, तेरस साहू, निर्मल दास वैष्णव, प्रतीक शुक्ला, पुरेन्द्र सोनी, रामचरण कर्ष, बलराम शुक्ला,सहित अनेक गणमान्य जन एवं नगर की माताएं बड़ी संख्या में उपस्थित थी। पूजा अर्चना पंडित नवीन शर्मा जी ने संपन्न कराया।

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