*कांवड़ यात्रा के दौरान मांस, मदिरा, तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए और न ही कांवड़ का अपमान ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए* समाजसेविका ,शिव भक्तजानकी गुप्ता

*कांवड़ यात्रा के दौरान मांस, मदिरा, तामसिक भोजन नहीं करना चाहिए और न ही कांवड़ का अपमान ज़मीन पर नहीं रखना चाहिए*

समाजसेविका ,शिव भक्तजानकी गुप्ता
****************************श्रावण के महीने के आखरी सोमवार को कांवड़ यात्रा का बड़ा महत्व है.माना जाता है कि शिव को केवल एक लोटा जल चढ़ा कर प्रसन्न किया जा सकता है.
कांवड़ यात्रा का महत्वपुराणों में बताया गया है कि कांवड़ यात्रा देवा दी देव महादेव को प्रसन्न करने का सबसे सरल और सहज तरीका है। भगवान शिव के भक्त बांस की लकड़ी पर दोनों ओर टिकी हुई टोकरियों के साथ गंगा के तट पर पहुंचते हैं और टोकरियों में गंगाजल भरकर लौट जाते हैं।
कांवड़ यात्रा शिवो भूत्वा शिवम जयेत यानी शिव की पूजा शिव बन कर करो को चरितार्थ करती है.
यह समता और भाईचारे की यात्रा भी है. सावन जप, तप और व्रत का महीना है.
शिवलिंग के जलाभिषेक के दौरान भक्त पंचाक्षर, महामृत्युंजय आदि मंत्रों का जप भी करते हैं.

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