जब शांति समिति की बैठक को भूल गया प्रशासन, फटकार पड़ने पर आनन-फानन में बुलाई बैठक?
रायपुर। आज जब प्रदेश में विघ्नसंतोषी तत्वों द्वारा समुदायों के बीच तनाव का माहौल पैदा करने की कोशिश की जा रही है, ऐसे में प्रमुख त्यौहार के दौरान अधिकारी अगर शांति समिति की बैठक करवाना भूल जाएं तो इसे क्या कहेंगे। जी हां, राजधानी रायपुर में इस बार ऐसा ही हुआ है। यहाँ ईद के त्यौहार से पहले शांति समिति की बैठक को लेकर जो हुआ उसकी सभी आलोचना कर रहे हैं।
दरअसल बेमेतरा में हुई घटना के बाद प्रदेश के सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया था। ताकि दूसरी जगह समुदायों के बीच तनाव की नौबत न आये। प्रदेश में हर वर्ष प्रमुख तीज-त्योहारों के ठीक पहले पुलिस एवं प्रशासन के संयुक्त प्रयास से शांति समिति की बैठक जिला और थाना स्तर पर की जाती है। मगर आश्चर्य की बात यह है कि इस बार राजधानी रायपुर जैसे महत्वपूर्ण शहर में पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी शांति समिति की बैठक करना ही भूल गए थे। वह भी ऐसे समय मे जब प्रदेश का माहौल संवेदनशील है?।
21 अप्रैल को रमजान के महीने का आखिरी दिन था और अगले दिन ईद का त्यौहार होने की पूरी संभावना थी, तब भी किसी बैठक के आसार नजर नहीं आ रहे थे। ऐसे में शांति समिति से जुड़े कुछ वरिष्ठ नागरिकों ने उच्च अधिकारियों से फोन कर इसकी जानकारी दी, तब जिले के अधिकारियों को जमकर फटकार पड़ी और 21 अप्रैल शुक्रवार को ही शाम 5 बजे ईद मनाने की तैयारी में जुटे मुस्लिम समुदाय के शांति समिति से जुड़े लोगों को फोन करके कलेक्ट्रेट के रेडक्रॉस भवन में शाम 7 बजे शांति समिति की बैठक के आयोजन की सूचना दी गई। इस दौरान अधिकांश लोगों ने अगले दिन ईद के होने और उसकी तैयारी में व्यस्त होने की जानकारी देते हुए बैठक में शामिल होने में असमर्थता जता दी?।
केवल मुस्लिम समुदाय के लोग हुए शामिल
21 अप्रैल को शाम 7 बजे रेडक्रॉस भवन में बैठक शुरू हुई, मगर इसमें पहुंचे लोगों को इस बात पर आश्चर्य हुआ कि यहां केवल मुस्लिम समुदाय के लोग ही पहुंचे हुए थे, और वो भी बमुश्किल सात-आठ की संख्या में। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ऐन वक्त पर ईद की तैयारी के समय बैठक रखने और केवल मुस्लिमों को ही बुलाए जाने पर नाराजगी जताई। तब उन्हें बताया गया कि दूसरे समुदाय के नागरिकों को भी बुलाया गया था मगर लोग नहीं आ सके?।
व्यस्तता के चलते भूले बैठक
इस बैठक में एएसपी, डीएसपी, एसडीएम और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों से भी कम संख्या नागरिकों की थी। यहां सफाई दी गई कि जिले के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्र में सीएम का भेंट-मुलाकात कार्यक्रम था, जिसमें व्यस्तता के चलते समय पर बैठक नहीं हो सकी। हालांकि बैठक हर बार की तरह औपचारिक रही और केवल सफाई और पानी की व्यवस्था को लेकर ही बातचीत हुई। केवल एक समुदाय की उपस्थिति में शांति समिति की बैठक के मूल उद्देश्य पर चर्चा तो संभव ही नहीं थी। बता दें कि इस बार राजधानी के एक-दो थानों को छोड़ कर किसी थानाक्षेत्र में भी शांति समिति की बैठक नहीं हुई है।
नए लोगों को शामिल करने की है जरूरत
शांति समिति में विभिन्न समुदाय के नागरिकों को शामिल किया जाता है। अमूमन समुदायों के पदाधिकारियों को इसमें सदस्य बनाया जाता है, ताकि वे समाज के कार्यक्रमों और गतिविधियों तथा समस्याओं के बारे में अच्छी तरह चर्चा कर सकें। सिख समुदाय के एक सदस्य ने चर्चा करते हुए बताया कि समिति में काफी पुराने लोग हैं और कई तो अब रहे नहीं। बेहतर ये होगा कि समिति में नए चेहरों को भी शामिल किया जाए, और रचनात्मक कार्यों के लिए भी इस समिति का उपयोग किया जाए, ताकि सभी समाज के लोग एक दूसरे से जुड़े रहें और समरसता कायम रहे?।

