बाल विवाह रोकथाम हेतु कार्यशाला का आयोजन

अयान न्यूज भांसी दंतेवाड़ा से

असीम पाल कि रिपोर्ट

*बाल विवाह रोकथाम हेतु कार्यशाला का आयोजन* दंतेवाड़ा, 21 अप्रैल 2023। कलेक्टर श्री विनीत नंदनवार के निर्देशन में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अक्षय तृतीया के अवसर पर जिला बाल संरक्षण इकाई के द्वारा बाल-विवाह की पूर्ण रोकथाम के लिए विकासखंड स्तरीय समन्वय बैठक सह कार्यशाला का आयोजन जिले के सभी विकासखण्ड में किया जा रहा है। कुआकोंडा में आयोजित कार्यशाला में जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री रवि शंकर सनाड्य द्वारा बताया गया की, अक्षय तृतीया के अवसर पर बड़ी संख्या में विवाह आयोजन होते है, जिनमें बाल-विवाह होने की संभावना प्रबल रहती है। इन अवसरों पर विशेष रूप से विवाह आयोजनों की निगरानी करते हुए, बाल विवाह आयोजनों की रोकथाम के लिए जिला, विकासखण्ड, ग्राम एवं वार्ड स्तर पर विभिन्न विभागों के समन्वय से निगरानी दल गठित किये जाने की आवश्यकता है। जिला बाल संरक्षण इकाई के श्री शशि कान्त झा ने बताया की आगामी 22 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर बाल विवाह की रोकथाम के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। बाल विवाह करने व करवाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के अनुसार लड़की की शादी 18 वर्ष व लड़के की शादी 21 वर्ष से पहले की जाती है तो वह कानूनन अपराध है व उसकी सूचना तुरंत प्रशासन के अमलों पुलिस अधीक्षक, एसडीएम, तहसीलदार, जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास, सीडीपीओ, नजदीकी पुलिस थाना चौकी, आंगनबाड़ी वर्कर, जिला बाल संरक्षण अधिकारी तथा पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 100, चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098, महिला हेल्पलाइन नंबर 181 और पुलिस हेल्पलाइन नंबर 112 पर भी दे सकते हैं। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 का उल्लंघन करने पर एक्ट के तहत बाल विवाह के आयोजन में भागीदार सभी लोगों पर कानूनी कार्यवाही की जा सकती है जिसके तहत 2 वर्ष तक के कठोर कारावास अथवा जुर्माना जो कि एक लाख रुपये तक अथवा दोनों से दण्डित किया जा सकता है। विनोद साहू, जिला समन्वयक यूनिसेफ ने बताया कि बाल-विवाह बच्चों के अधिकारों का अतिक्रमण करता है। बाल विवाह के कारण हिंसा, शोषण और यौन शोषण का खतरा बढ़ जाता है। बाल विवाह बच्चे का बचपन खत्म कर देता है। उम्र से पहले शादी होने पर बच्चा शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा से वंचित रह जाता है। नाबालिग होते हुए उनके गर्भवती होने और बच्चे को जन्म देने की स्थिति आ जाती है। इसका असर उनके स्वास्थ्य पर भी पड़ता है और शिशु के स्वास्थ्य पर भी। बैठक में सीडीपीओ, बीपीएम, बीटीओ, सेक्टर सुपरवाइजर स्वास्थ्य विभाग विकास खण्ड समन्वयक, एमटी मितानिन, मितानिन कार्यक्रम, सेक्टर पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, बीपीएम, बीपीआरसी, सरपंच पंचायत विभाग एवं जिले के सामाजिक संस्थाओं ने भाग लिया।
भांसी से असीम पालदंतेवाड़ा जिला ब्यूरो

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