टीचर के ट्रांसफर पर फूट-फूटकर रोए विद्यार्थी, माता- पिता और अभिभावक,

*टीचर के ट्रांसफर पर फूट-फूटकर रोए विद्यार्थी, माता- पिता और अभिभावक,
कहते हैं काम के बदले सिर्फ पैसा नहीं प्यार भी मिलता है. ऐसा ही कुछ राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय समेल के प्रधानाध्यापक रामस्वरूप चौधरी के साथ हुआ, जो स्कूल विदाई पर शिक्षकों के लिए प्रेरणस्त्रोत बन गया है.। कोट किराना पंचायत के सरकारी स्कूल समेल में गुरु और शिष्य में अटूट प्रेम देखने को मिला। समेल विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामस्वरूप चौधरी की विदाई पर पूरा स्कूल रो पड़ा. बच्चे भी अपने प्रिय सर को गले लगाकर फूट-फूटकर रोए। इस दौरान हैंड मास्टर साहब भी अपने आंसू रोक नहीं पाए। हर ग्राम वासी की आंखों में आंसू देखा।
मोहन सिंह समेल ने, हमारे गांव की बोली में कहते जो हकरा होता है उसे सब हखरा ही कहते हैं,, क्योंकि वह बहुत ही सराहनीय व्यक्ति थे, 2 साल के अंतराल में विद्यालय की सारी कमियां दूर कर दी, विद्यालय में बच्चों के लिए बैठने के लिए कक्षा- कक्ष हो या बच्चों के खाने के लिए बर्तन की सुविधा, पोषाहार बनाने वालों के लिए बड़े बर्तन की व्यवस्था, गैस की भट्टी या फिर कोई अन्य सुविधा , विद्यालय में स्टेज हो या ग्राउंड हो या फिर विद्यालय का मेन गेट हो सारे कार्य उनके नेतृत्व में भामाशाह को जोड़कर किया गया। चौधरी साहब का ग्राम वासियों के साथ 2 साल के दौरान इतना मित्रता पूर्ण व्यवहार बन गया कि वह सबके चहेते बन गए। विद्यालय के प्रति उनका लगाव बहुत ही ज्यादा था कि वह विद्यालय समय के पश्चात विद्यालय के कार्य में लगे रहते थे।विद्यालय से ट्रांसफर की बात सुनकर बच्चे ही नहीं उनके अभिभावकों की आंखे भी नम हो गई।गुरुजी की कमी इस विद्यालय से जाने पर बच्चे तो क्या उनके अभिभावकों को भी कितना खलेगा।
ग्राम वासियों ने कहा कि कुछ समय बाद गुरुजी को वापस बुला कर धूमधाम से विदाई दी जाएगी। वार्ड पंच नारायण सिंह चौहान और वार्ड पंच टीकम चंद जांगिड़ सहित ग्राम वासियों ने नम आंखों से गुरु जी को विदाई दी। ग्राम वासियों ने शानदार विदाई समारोह के आयोजन के लिए गुरु जी को वापस आमंत्रित किया है बहुत जल्द ही एक शानदार विदाई समारोह का आयोजन किया जाएगा। विद्यालय स्टाफ को भी प्रधानाध्यापक जी की कमी खलेगी।

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