महीनो से माता पिता बेटी अन्न्याश्री की मौत पर न्याय की कर रहे प्रतिक्षा, नही सूख रहे माता पिता के आंसू।

अयान न्यूज भांसी दंतेवाड़ा से
असीम पाल कि रिपोर्ट

महीनो से माता पिता बेटी अन्न्याश्री की मौत पर न्याय की कर रहे प्रतिक्षा, नही सूख रहे माता पिता के आंसू।

पिता ने जिला अस्पताल के डाक्टर सहित स्टाफ नर्स पर इलाज में लापरवाही का लगाया था आरोप,मामूली बुखार में एक साथ 4 इंजेक्शन लगाते ही तड़पकर नन्ही बच्ची ने पिता की बांहों में तोड़ा दम।

किसी और के साथ ना हो इसलिए लड़ रहे लड़ाई न्याय पालिका पर भरोसा -: पिता प्रदीप पासवान

दंतेवाड़ा:- डॉक्टर को ईश्वर का दूसरा रूप माना जाता है कोरोना काल में भी कई जगहों पर डाक्टरों को उनके बेहतर कार्य के लिए सम्मानित भी किया गया ,लेकिन कई बार डाक्टरों के द्वारा गलत इलाज की वजह से लोगो को जान गवाते भी देखा गया है। मामला दंतेवाड़ा जिला अस्पताल का है जहां इलाज के साथ साथ कई बार इलाज में लापरवाही बरतने की वजह से मरीज की मौत के कई मामले प्रकाश में आए है। अस्पताल के सौंदर्यीकरण में करोड़ों खर्च किए गए सुविधाओ के नाम पर भी कई मशीनें लगाई गई परंतु इलाज को लेकर लोगो को बड़े शहरों के अस्पतालों की ओर रुख करना ही पड़ता है।

व्यक्ति उस वक्त फस जाता है जब कोई अपातकालीन स्थिति या प्राथमिक उपचार करवाना हो उसे मजबूरी में ना चाहते हुए भी जिला अस्पताल जाना ही पड़ता है।

देश सेवा में लगा एक खाकी वर्दीधारी पिता अपने बिटिया की मौत पर न्याय व्यवस्था से न्याय चाहता है। कैसी विडंबना है कि देशसेवा जैसे महत्वपूर्ण कार्य में लगे कर्मी को ही न्याय के लिए बेबस होना पड़ता है तो ऐसे में सवाल उठना लाजमी है की दूसरो के साथ न्याय कितनी जल्दी होता होगा

मामला 2 सितंबर 2022 का है। इस दिन की घटना को याद करते ही पासवान दंपत्ति की आंखे भर आती है। उन्होंने कभी सपने में भी नही सोचा होगा कि मामूली बुखार को लेकर 8 वर्षीय बच्ची अनन्याश्री को जिला अस्पताल लेकर जाना उनके जिगर के टुकड़े को उनसे हमेशा के लिए दूर कर देगा

पिता बताते है की अनन्याश्री को मामूली बुखार का चेकअप कराने 2 सितंबर को जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा पहुचे जिसके बाद ड्यूटी में लगे शिशु रोग विशेषज्ञ डाक्टर राजेश ध्रुव ने ये कहकर एडमिट किया की मामूली बुखार है भर्ती कर दीजिए ठीक हो जाएगी लेकिन फिर लापरवाही की हद ऐसी हुई कि बच्ची ने तड़प-तड़प कर दूसरे दिन दम तोड़ दिया पिता ने बताया की बच्ची को खाली पेट होने के बावजूद एक साथ डाक्टर के कहने पर चार इंजेक्शन दिए गए। इंजेक्शन लगाते ही बच्ची की तबियत बिगड़ने लगी बच्ची ने उल्टी-दस्त करना शुरू कर दिया। लगातार बिगड़ती तबियत के बावजूद न तो रिफर किया न ही बड़े चिकित्सको ने बच्ची को देखना मुनासिब समझा फलतः माता पिता के आंखों के सामने बच्ची ने दुनिया को अलविदा कह दिया इस घटना का दूसरा पहलू यह भी है कि ना तो इंजेक्शन लगाने से पहले बच्ची के रक्त की रिपोर्ट का इंतजार किया गया और ना ही मृत देह का पोस्टमार्टम किया गया भी जो कही ना कही गलत इलाज की तरफ इशारा करता है। पिता कहते है की इस विषय को संज्ञान में लेकर सीसीटीवी फुटेज एकत्रित कर मामले की तह तक जाया जा सकता है । लेकिन बगैर ईमानदारी से यह तो संभव ही नहीं है ।दंपति को उनकी बच्ची तो अब वापस नहीं मिल सकती लेकिन उन्होंने अपनी लड़ाई हम सभी के बच्चों के सुरक्षा के लिए जारी रखी है क्या देशसेवा करने वाले योद्धा के इस भावुकतापूर्ण संघर्ष में सरकार-प्रशासन और हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी नहीं ? मौत के सिलसिले को रोकने लापरवाह कर्मियों पर सख्त कार्यवाही की जाए ताकि एक परिवार का विश्वास व्यवस्था पर बना रहे। पिता ने इसकी लिखित शिकायत जिला कलेक्टर विनीत नंदनवार व पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी से की थी जिससे बाद फिलहाल मामला एसडीएम कोर्ट में चल रहा है। अब देखने वाली बात यह है की जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को कैसे दुरुस्त किया जाता है साथ ही मामले में बच्ची अनन्या श्री को कब तक न्याय मिलता है।

भांसी से असीम पाल

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