अयान न्यूज मनीष पाल की रिपोर्ट। हम डरने वाले नही है माननीय कौशिक
मैं छात्र और युवाओं की लड़ाई जमीन से लेकर सदन तक लडूंगा – विनोद घृतलहरे
पूर्व नेता प्रतिपक्ष बिल्हा विधानसभा विधायक के द्वारा दिए गए धमकी पर छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष विनोद घृतलहरे ने 31 दिसंबर को हुए कार्यक्रम की वास्तविकता को विस्तार से बताते हुए अपनी प्रतिक्रिया दिया।
चुकी पूरा मामला शासकीय महाविद्यालय सरगांव में वार्षिक उत्सव से से जुड़ा है । जिसमे बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे क्षेत्रीय विधायक पूर्व नेता प्रतिपक्ष कौशिक , जिला पंचायत सदस्य ,श्रम कल्याण बोर्ड छत्तीसगढ़ शासन सदस्य श्रीमती अंबालिका साहू , महाविद्यालय के निर्वाचित पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद घृतलहरे पहुंचे हुए थे। क्योंकि वार्षिक उत्सव एक गैर राजनीतिक कार्यक्रम होता है।इसी परंपरा के अनुरूप ही दोनो दलों के नेताओ को बुलाया गया था। और उम्मीद था की किसी प्रकार का राजनीतिक बयान बाजी नही किया जाएगा।
लेकिन शुरुआत से ही धरमलाल कौशिक के कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक नारे बाजी करना शुरू कर दिया और लगातार करते रहे ।इसी बीच विनोद घृतलहरे ने छात्र हित से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर जब दोनो जनप्रतिनिधि के सामने मांग किया उस मांग को सुनकर उपस्थित छात्र छात्राओं ने छात्रसंघ अध्यक्ष के मांग पर तालियां बजाने शुरू कर दिया, और सभी लोग उत्साहित नजर आए।
तभी भाजपा के नेताओं द्वारा धरमलाल कौशिक जिंदाबाद के नारे जोर जोर से लगाना शुरू कर दिए। जिससे गैर राजनीतिक कार्यक्रम को राजनीतिक बनाया गया।
फिर माननीय कौशिक जब संबोधन के लिए आए और लगातार राजनीतिक मुद्दे पर भाषण देना शुरू कर दिया और छात्रसंघ द्वारा किए गए मांग पर कोसते गए और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विनोद घृतलहरे को नेतागिरी करने आए हो, तुम छात्रसंघ के नही कांग्रेस के नेता हो कहकर भरे मंच में खरी खोटी शुनाने लगे।
जिसके प्रतिक्रिया स्वरूप वहा उपस्थित NSUI छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने भूपेश बघेल जिंदाबाद और धरमलाल दबाव की राजनीति नही चलेगी जैसे नारे लगाए।। जिससे भाषण दे रहे कौशिक आग बबूला हो गए और छात्रसंघ के पदाधिकारियों को दो मिनट में राजनीति सटका दूंगा कहके धमकी दे डाले।
और इसका वीडियो 2 दिन से वायरल हो रहा है
जिस पर
विनोद घृतलहरे का जवाब:
माननीय बिल्हा विधायक कौशिक कॉलेज जीवन में स्वमं छात्रसंघ की राजनीति से मैन स्ट्रीम पॉलिटिक्स में आए है और छत्तीसगढ़ के बड़े पदों में काम किए ,उन्हें बड़े नेताओं में गिने जाते है । एक संवैधानिक पद पर चुने हुए जनप्रतिनिधियों द्वारा कही गई ऐसी बाते अशोभनीय निंदनीय है।

