तीन राज्य मिलकर बनाएंगे शिकारियों की कुंडली
रायपुर:-छत्तीसगढ़,मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के सीमावर्ती कारिडोर में वन विभाग शेर और जंगली. जानवरों को बचाने के लिए ज्वाइंट आपरेशन करेगा। इसके लिए तीनों राज्य फरवरी में संयुक्त बैठक करने वाले हैं। राज्य एक-दूसरे राज्यों से वन सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण भी दिलवाएंगे. ताकि जंगल में शिकार यानी अपराध कम हो सके।
अभी छत्तीसगढ़ के वन सुरक्षा गार्डो’ को मध्य प्रदेश भेजा जा रहा है। इन राज्यों के बीच समय पर सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक समझौता होगा। छत्तीसगढ़ के भोरमदेव अभयारण्य और कान्हा टायगर रिजर्व मध्य प्रदेश समेत महाराष्ट्र के इलाकों में वन विभाग ने गांव-गांव तक अपना गुप्तचर फैलाने की कार्ययोजना बनाई है। जानकारी के अनुसार इन गुप्तचरों को वन विभाग पुरस्कार के तौर पर कुछ राशि भी देगा।
तरेगांव-फेन अभ्यारण्य की तरफ होते हुए कान्हा टायगर रिजर्व से वापस उसी इन अभ्यारण्यों में होगी विशेष रूट पर विचरण करते रहते हैं, जिससे निगरानी: अचानकमार टायगर रिजर्व, आसपास के गांव में जनहानि और फेन अभ्यारण्य, कान्हा टायगर रिजर्व पशुहानि की संभावना बनी रहती है, इस समस्या को खत्म करने के लिए काम किया जाएगा।
मध्यप्रदेश और भोरमदेव अभ्यारण्य
के कोरीडोर में खैरागढ़, राजनांदगाव,
कवर्धा और डिंडौरी वनमंडल के
लगभग 250 सीमावर्ती गांव के
लोगों को जागरुक किया जा
वन्य प्राणी गौरेला-पेड़ी में
अचानकमार
छत्तीसगढ़ का अचानकमार टाइगर रिजर्व । फाइल फोटो
तीन राज्य मिलकर हमने जंगल के शिकारियों को पकड़ने और सीमावर्ती गांव के लोगों को जागरुक करने की योजना बनाई है। फरवरी में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की बैठक आयोजित करके रणनीति बनेगी।
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बीपी सिंह
संयुक्त टीम का यह है मकसद • हाथी और शेर के विचरण के लिए
सुरक्षा की व्यवस्था करना • मानव-वन्यप्राणी द्वंद्व को रोकने के लिए लोगों को जागरुक करना
• वन्यप्राणी शिकार की रोकथाम करना और अपराधों पर नियंत्रण करना
सीसीएफ, मुख्य वन संरक्षक, दुर्ग • वन अपराध पर नियंत्रण करना और एक-दूसरे को सूचना देना
• वनवासियों में अंधविश्वास को दूर करने को जागरुक करना
• पारिस्थितिकीय पर्यटन को प्रारंभ करने की कार्ययोजना बनाना
• घास और जंगल मैदान की पहचान कर गणना करना

