खबर यह है कि श्री नायक के द्वारा CCF कांकेर रहते भी अपने आदतानुसार CR लिखने में ऐसी कमाल चलाई की मत पूछों. कांकेर वन वृत के 37 ऐसे अधिकारी कर्मचारियों के CR बिगाड़ी की मत पूछिए?.
भूरी बिच्छी के डंक में जितना दर्द होता है ठीक उसी तरह इनके CR बिगाड़ने से त्रस्त लोग आज भी कराह नही पा रहें हैं इनमें से अधिकांश तो आज भी तकलीफ़ में गुजारा कर रहें हैं कुछ तो किस्मत ख़राब सोंच के बैठें हैं, कुछ कोस रहे है बद्दुवा दे कर दिल को तसल्ली दे रहें हैं, कुछ लोगो ने तो उनसे मिलकर अपना काम बना लिए हैं।
वनमंत्री से लेकर उच्चाधिकारियों के द्वारा जब इनके CR लिखतें हैं और जब इन्हें “बहुत अच्छा या क +” दिया जाता है तब ये इनके अधीनस्थों के कार्यो के मूल्यांकन के आधार पर CR क्यों नही देते, क्योंकि हमारा मानना है कि जब एक CCF अपने वन में वृत में 5 से 6 DFO, 18 से 24 SDO 35 से 50 रेंजर्स के CR लिखता है और उनमें से अधिकांश को खराब की श्रेणी में रखता है साथ ही विशेष टिप्पणी के साथ जिससे ऊपर के अधिकारी भी उनके दिए CR को न सुधार पाए. ऐसे में ऊपर के अधिकारी खुद CCF या DFO के दिए CR का स्व-संज्ञान लेना चाहिए कि नायक या अन्य द्वारा अपने वन वृत या वनमंडल के अधिकांश लोगों को ख, ग, घ CR दिया गया है तो ऐसे में इनके वन वृत या वनमंडल में जो काम हुवें है वो कैसे हो गया. या इतने लोग खराब थे तो इतने अच्छे कार्य किसने कराया क्या CCF या DFO ने स्वंय फील्ड में जाकर कराए. जब उच्चाधिकारियों के द्वारा ऐसे क्रॉस चेक करके CCF या DFO के द्वारा अपने अधीनस्थों को दिए CR की पड़ताल करके CCF और DFO को CR देंगे तब ऐसे अधिकारियों पर लगाम लगेगा, नही तो बस राम भरोसे वन विभाग जैसा चल रहा है वैसे चलने दिया जाए।

