करवा चौथ का व्रत कुंवारी लड़कियों के लिए कितना सही? जानिए इससे जुड़ी मान्यता से लेकर सबकुछ

करवा चौथ का व्रत कुंवारी लड़कियों के लिए कितना सही? जानिए इससे जुड़ी मान्यता से लेकर सबकुछ

अयान न्यूज़ राकेश कुमार बंसल जिला ब्यूरो चीफ. मनेंद्रगढ़. चिरमिरी भरतपुर

Karwa Chauth Vrat 2022: हिन्दू धर्म में त्योहारों का विशेष महत्व होता है. इस कार्तिक माह में सुहागिनों का सबसे बड़ा त्योहार माना जाने वाला करवा चौथ का व्रत भी रखा जाएगा। मान्यता है कि पत्नी अपने पति की दीर्घायु के लिए ये व्रत रखती हैं.

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार प्रत्येक वर्ष करवा चौथ का व्रत कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मनाया जाता है। इस वर्ष कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि 13 अक्तूबर को रात 01 बजकर 59 मिनट से शुरू हो जाएगी, जो 14 अक्तूबर को रात 03 बजकर 08 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। हिंदू धर्म में कोई भी व्रत-त्योहार उदया तिथि के आधार पर ही निर्धारित की जाती है। इस वजह से इस साल करवा चौथ का व्रत 13 अक्तूबर 2022 को ही मनाया जाएगा।

महिलाएं करवा चौथ के दिन कठिन उपवास रखती है और चांद के निकलने तक पानी की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं। दिन भर व्रत रहने के बाद रात में चौथ का चांद देखने के बाद छलनी में पति का चेहरा देखकर ही महिलाएं व्रत का पारण करती हैं। इस व्रत को पति के दीर्घायु और दांपत्य जीवन में खुशहाली प्रदान करने वाला माना गया है, इसलिए शादी-शुदा महिलाओं के द्वारा ये व्रत रखने का विधान है।

वैसे तो ये व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा करने का विधान है, लेकिन कई बार लोगों के मन में ये प्रश्न आता है कि क्या अविवाहित लड़कियां भी करवा चौथ का व्रत कर सकती हैं या नहीं। चलिए जानते हैं इस सवाल का जवाब…

क्या अविवाहित लड़कियां भी रख सकती हैं करवा चौथ का व्रत?
ज्योतिष की माने तो अविवाहित लड़कियां अपने मंगेतर या प्रेमी जिसे वो अपना जीवन साथी मान चुकी हों, उनके लिए करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं। मान्यता है कि इससे उन्हें करवा माता का आशीष प्राप्त होता है। लेकिन कुंवारी कन्याओं के लिए करवा चौथ व्रत व पूजन के नियम अलग-अलग होते हैं, इसलिए यदि आप अविवाहित हैं और करवा चौथ का व्रत करना चाहती हैं, तो सबसे पहले इन बातों के बारे में जान लेना आवश्यक है।

अविवाहित लड़कियां करवा चौथ व्रत में इन बातों का रखें ध्यान
यदि कोई कुंवारी लड़की करवा चौथ का व्रत रखने जा रही है तो निर्जला व्रत करने के बजाए निराहार रहकर व्रत कर सकती है। ज्योतिष के अनुसार, कुंवारी कन्याओं के लिए निर्जला व्रत रखने की कोई बाध्यता नहीं होती है, क्योंकि उन्हें सरगी आदि नहीं मिल पाती है।

वैसे तो इस व्रत में भगवान शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और चंद्रमा का पूजन किया जाता है। लेकिन कुंवारी कन्याओं को करवा चौथ के व्रत में केवल मां करवा की कथा सुननी चाहिए व भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करना चाहिए।

कुंवारी लड़कियां तारों को देखकर अर्घ्य दे सकती हैं और व्रत का पारण कर सकती हैं। मान्यता के अनुसार, चंद्रमा को अर्घ्य देने का नियम केवल सुहागिन स्त्रियों के लिए होता है। इसके अलावा अविवाहित लड़कियों को छलनी के प्रयोग करने की भी कोई बाध्यता नहीं है। वे बिना छलनी के ही तारों को देखकर अर्घ्य दे सकती हैं और व्रत का पारण कर सकती हैं

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