परमानंद जांगडे ने मोनेट संयंत्र में दुर्घटना में अपाहिज किशुन मरकाम को 30 लाख रुपए मुआवजा तथा उनके परिवार के 1 सदस्य को परमानेंट नौकरी देने की मांग किया

रायपुर :-बीते रात दिनांक 3 जुलाई को किशुन मरकाम निवासी ग्राम कुरूद जो मोनेट संयंत्र में रोलिंग मिल में कार्यरत थे, काम करते वक्त दुर्घटना हो जाने से उनके दोनों पैर काफी क्षतिग्रस्त हो गए हैं जिनका इलाज कालरा नर्सिंग होम रायपुर में चल रही है मोनेट संयंत्र प्रबंधन द्वारा मंदिर हसौद थाने में इस घटना की सूचना कल तक नहीं दी गई थी , दुर्घटना में पीड़ित परिवार को कंपनी प्रबंधन तत्काल 30 लाख उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए प्रदान करें तथा उनके परिवार के एक सदस्य को परमानेंट नौकरी में रखें कंपनी प्रबंधन के इस प्रकार की लापरवाही को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा कंपनी के कर्मचारी एवं मजदूरों के साथ खुलेआम शोषण हो रही है अगर कंपनी प्रबंधन अपने कार्यों में सुधार नहीं करते हैं तथा श्रम नियमों एवं सुरक्षा नियमों का पालन नहीं करते हैं तो मजबूरन मजदूरों एवं कर्मचारी के हितों में संयंत्र के सामने धरना प्रदर्शन करना पड़ेगा जिसके लिए कंपनी प्रबंधन स्वयं जिम्मेदार होंगे।मोनेट संयंत्र प्रबंधन की लापरवाही से पिछले 1 वर्षों में लगभग दर्जनों दुर्घटनाएं हुए हैं जिनसे वहां कार्यरत कर्मचारी मजदूरों को अपंगता एवं मृत्यु के शिकार होने को लेकर विभाग की लापरवाही एवं सेफ्टी नियमो का पालन नही करने का आरोप लगाए है। मोनेट सयंत्र प्रबन्धन की लापरवाही के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग हेल्थ सेफ्टी विभाग एवं प्रशासन द्वारा सख्त कार्यवाही करने की मांग किया है। इस प्रकार की दुर्घटनाएं रुक नहीं रही है तथा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति एवं परिवार को ना ही मुआवजा दी जा रही है ना ही उनके परिवार को परमानेंट नौकरी पर रखती है दुर्घटना की जानकारी को छुपाकर गुपचुप तरीके से मामले को दबाने का प्रयास करती है हाल ही में कुरुद के एक 11 वर्ष के बच्चे मोनेट के दीवाल में दब जाने से उसकी मृत्यु हो गई तथा उन्हीं के पिताजी जो मोनेट संयंत्र में कर्मचारी थे ड्यूटी दुर्घटना के दौरान उनकी मृत्यु हो चुकी है उनके परिवार जनों को ना ही कोई सहायता राशि दी गई है और ना ही उनके परिवार के सदस्यों को मोनेट संयंत्र में परमानेंट नौकरी दी गई है ।

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