हर घर नल जल योजना के तहत नाली खुदाई कर जैसे तैसे छोड़ रहे मिट्टी,गांव निवासी और राहगीरों पर मंडरा रहा जान जाने का खतरा जे. सी.बी से काम लेने पर मजदूरों को जाना पड़ रहा बाहर काम के लिए

हर घर नल जल योजना के तहत नाली खुदाई कर जैसे तैसे छोड़ रहे मिट्टी,गांव निवासी और राहगीरों पर मंडरा रहा जान जाने का खतरा ,जेसीबी से काम लेने पर मजदूरों को जाना पड़ रहा बाहर काम के लिए


जांजगीर चांपा। जिला जांजगीर चांपा के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल जल योजना के तहत जेसीबी से गली हो या सड़क हो खुदाई कर जैसे तैसे छोड़ दिया जा रहा है जो गांव निवासी और राहगीरों पर जान का खतरा बना हुआ है ग्राम निवासी व राहगीर जगह-जगह जेसीबी से खोदे गए गड्ढे से काफी परेशान हैं इसकी मौखिक सूचना अधिकारी को कई बार दिया जा चुका है मगर काम की जगह पर जाकर काम को देख लेना जिम्मेदार अधिकारी मुनासिब नहीं समझ रहे हैं एक ओर देखा जाए तो जेसीबी से खुदाई करना ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को काम पर डांका मरना हो जा रहा है अगर नाली खुदाई का काम ग्रामीणों से कराते तो ग्रामीणों को काम मिल सकता था जिससे उनको बाहर पलायन करना नहीं पड़ता मगर जेसीबी से काम करना लोगों के पलायन में वृद्धि हो रही है अगर काम ग्रामीणों से अपने अपने गांव स्तर में कराते तो बहुत से ग्रामीण अंचलों में ग्रामीणों को गांव पर ही काम मिल जाता मगर ऐसा नहीं हो रहा है जिससे ग्रामीण बाहर काम करने जाने पर मजबूर है गांव गली हो या सड़क जगह-जगह से जेसीबी पर गड्ढा कर दिया गया है और जस की तस छोड़ दिया गया है जिस पर आए दिन गाड़ी का पहिया गड्ढे पर फस जा रहा है वही सड़क से गुजरने वाले राहगीर सड़क पर मिट्टी का ढेर से गिरकर घायल हो रहे हैं गांव की गलियों की बात करें तो वहां की जेसीबी से खुदाई कर मिट्टी का डंप कर छोड़ दिया गया है ग्रामीण कैसे आवागमन करें इसका ध्यान नहीं रखा जा रहा है। अभी यह गड्ढे में फंसा हुआ चार पहिया वाहन जनपद नवागढ़ के ग्राम पंचायत सलखन का है जो काफी समय बाद गड्ढे से चार पहिया वाहन को निकाला गया यहां भी बड़ी दुर्घटना होते होते टल गया इस दुर्घटना से गाड़ी चालक की जान जाते-जाते बची वही अचानक से सड़क से चार पहिया वाहन जा रहा था के नाली के लिए छोड़े गए गड्ढे में फस गया और गाड़ी एक साइड हो गई सड़क से गुजर रहे बाइक चालक इसकी चपेट में आने से बाल-बाल बच गया वरना आज सड़क दुर्घटना में एक और बाइक चालक की जान जा सकती थी मगर इससे इसके जिम्मेदार अधिकारियों को किसी प्रकार से कोई सरोकार नजर नहीं आ रहा है।इस संबंध में पीएचई अधिकारी एस के शुक्ला से फोन पर बात करनी चाहिए मगर पुराने अधिकारी की तरह यह भी किसी का फोन उठाना मुनासिब नहीं समझते और फोन नहीं उठाया।

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