भारतीय संस्कृति में तालाबों का सामाजिक, सांस्कृतिक व पर्यावरण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। तालाब जल संरक्षण का प्रमुख आधार भी है। वही बरसो से मोवा का पुराना तालाब आज गंदगी के साथ जलकुम्भी में तब्दील हो चुका है इसके बाद भी निगम प्रशासन अपनी आंखें मूंद रखी है ।
डबरी तालाब की सफाई सालो से नहीं होने के कारण लोग नहीं कर पा रहे निस्तारी, तालाब का आलम यह है कि आज उसके किनारे निवास करने वालो ने पूरी तरह से अपनी जोखिम मे डाल. दहशत मे जीवन यापन करने को मजबूर है वर्तमान मे तालाब का पानी पूरी तरह से दुसित होकर जलकुम्भी व दलदल में तब्दील हो चुका है यह वही तालाब है जिसमे कभी मोवा के निवासी निस्तारी किया करते थे ।
वार्डवासी आरिफ सिद्दीकी व अज़ीम खान ने बताया कि डबरी तालाब में पूर्व मे रोजाना सैकड़ों लोग निस्तारी किया करते थे । नियमित साफ-सफाई के अभाव मे तालाब अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। साथ ही इस नाम मात्र के बचे तालाब में आज काफी जहरीले कीड़े पनप चुके है जोकि बेहद खतरनाक रूप ले चुके है । आरिफ ने बताया कुछ दिनों पहले ही इसी तालाब के दुसित पानी से उत्पन्न कीड़े ने एक महिला को काट लिया जिसका काफी इलाज करवाने के उपरांत पता चला कि वह केंसर का रूप ले चुका है व अन्ततः उस केंसर से उक्त महिला की मौत हो गई ।
वार्ड पार्षद पति हेमंत पटेल का कहना है कि संबंधित अधिकारी से तालाब की सफाई के लिए कहा गया है। लेकिन आज तक सफाई का कोई आदेश निगम प्रशासन के द्वारा नही निकाला गया है

