पत्रिका के लोकार्पण कार्यक्रम में बोले अवध नारायण पत्रकार. सभी पिछड़ा वर्ग को मिलकर लड़नी होगी सविधान की धारा 340 की लड़ाई.
नई दिल्ली: लक्ष्मीनगर ,मेट्रो के गेट न.03 के पास नई दिल्ली में विज्ञानमेव जयते मासिक पत्रिका के लोकार्पण समारोह में बोलते हुए अवध नारायण पत्रकार ने बताया कि जिस तरह से एससी के लिए धारा 341 और एसटी के लिए धारा 342 है उसी तरह से ओबीसी के लिए धारा 340 है। ओबीसी समाज को धारा 340 को सही तरीके से लागू कराने के लिए एक जुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है। एससी, एसटी के लिए 1949 में धारा 341 और धारा 342 की शुरुआत की गई थी । सन 1950 में संविधान लागू किया गया। और इसके साथ ही एससी एसटी का प्रतिनिधित्व / आरक्षण शिक्षा, रोजगार, पदोन्नति में किया गया । लेकिन ओबीसी बंधुओं के लिए 340 के तहत आरक्षण लागू नहीं हुआ।
लंदन में हुए 1932 के गोलमेज सम्मेलन में ओबीसी समाज का कोई मजबूत प्रतिनिधि नहीं था। जैसे एससी/एसटी के तरफ से बाबासाहेब थे। फिर 1946-1949 में संविधान लिखते समय, बाबासाहेब ने सोचा कि हमारे ओबीसी भाइयों के साथ भी यही स्थिति है. जो स्थिति एससी/ एसटी की है। उन्होंने संविधान सभा में चर्चा शुरू करते हुए कहा कि संविधान में एससी/ एसटी की तरह ओबीसी के लिए भी आरक्षण का प्राविधान होना चाहिए। उस समय के तथाकथित उच्च वर्णों के नुमाइंदे बोले. एससी/ एसटी के साथ ठीक है लेकिन ये ओबीसी कौन हैं ?
इस सवाल पर बाबासाहेब ने संविधान सभा में एक ही बात कही कि जो लोग SC, ST नहीं हैं, और वे उच्च जाति के नहीं हैं, वे सभी OBC हैं। खंड 340 के अनुसार उनकी जनगणना की जाएगी और प्रत्येक क्षेत्र में जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाएगा। हालांकि 1950 के बाद से आज तक ओबीसी की जाति आधारित जनगणना नहीं हुई है, इसलिए उन्हें आरक्षण नहीं मिला है। जब 1990 में ओबीसी की 60% आबादी को बिना जनगणना कराए 27% आरक्षण लागू किया गया था तो देश में भूचाल सा आ गया। मंडल आयोग के खिलाफ कमंडल यात्रा निकाली गई! प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को अपनी कुर्सी त्यागनी पड़ी।
यदि ओबीसी की गणना की जाती है और उनके आंकड़े आते हैं, और उन आंकड़ों के आधार पर उन्हें अनुच्छेद 340 के अनुसार आरक्षण / प्रतिनिधित्व देना पड़ता है ऐसे में देश में 52% से 60% IAS, IPS अधिकारी होंगे, जो आज केवल 4% है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में, 52 - 60% न्यायाधीश होंगे, जो आज आधा प्रतिशत है। हर साल बनने वाले बजट में से 52- 60% बजट का उपयोग ओबीसी के विकास के लिए किया जाएगा। ओबीसी को हर क्षेत्र में हिस्सेदारी मिलेगी लेकिन ओबीसी की तब तक प्रगति नहीं होंगी जब तक कि धारा 340 के तहत जनगणना नहीं होती है। इसलिए, सभी ओबीसी भाइयों को सरकार को अनुच्छेद 340 को लागू करने के लिए मजबूर करना चाहिए। अगर जम्मू और कश्मीर के लोगों की प्रगति के लिए अनुच्छेद 370 को रद्द किया जा सकता है, तो भारत भर में ओबीसी के लिए अनुच्छेद 340 क्यों लागू नहीं किया जा सकता है ? ऐसा क्यों है कि देश के स्वतंत्र होने के 75 साल बाद भी, धारा 340 को लागू नहीं किया गया है।
सामाजिक न्याय आंदोलन (के0टी0 ) के बैनर तले, विज्ञानमेव जयते, भारत गणराज्य की राष्ट्रीय हिन्दी अंग्रेजी मासिक पत्रिका विज्ञानमेव जयते का लोकार्पण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के आयोजक, सामाजिक न्याय आंदोलन के0टी0 के राष्ट्रीय मुख्य संरक्षक एवं संस्थापक, जी0के0 शर्मा , राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर थे, कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर एम यू दुआ प्रेजिडेंट आल इंडिया ह्यूमन राइट्स एसोसियेशन ने की,अथिति वक्ताओं में सर्व श्री सीए ध्रुव अग्रवाल डायरेक्टर हिन्दी खबर न्यूज चैनल, वासुदेव कुमार शर्मा संपादक विज्ञानमेव जयते, प्रोफेसर सतेंद्र ठाकुर, अवध नारायण पत्रकार संपादक शोषित जंग समाचार पत्र, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अशोक कुमार शर्मा, ईन्जिनियर कामता प्रसाद, पत्रकार धमेंद्र कुमार मोर्या, सुमित कुमार सेन,प्रवीण कुमार एव॔ अन्य व्यक्तित्व की गरिमामय उपस्थिती रही। सभी अतिथियों का स्वागत पत्रिका भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के अंत में डाॅ बासुदेव कुमार शर्मा ने पत्रिका के लोकार्पण कार्यक्रम में शामिल सभी साथियों शुभ चिंतकों का आभार व्यक्त किया गया ।