दंतेवाड़ा.से
असीम पाल की रिपोर्ट

(शिक्षक दिवस स्पेशल)

आत्मसमर्पित नक्सलियों ने बच्चों के लिए बनाया स्कूल।

समर्पित नक्सलियों के बनाए हुए स्कूल में रोज होती है पढ़ाई।

शिक्षक कई मुश्किलों को पार कर जाते है पढ़ाने।

एंकर..दंतेवाड़ा जिले का एक ऐसा स्कूल जिससे नक्सलियों द्वारा बनाया गया है। यह वही स्कूल है जिसे वर्ष 2015 में नक्सलियों ने तोड़कर ध्वस्त कर दिया था। तोड़ने के बाद गांव एवं नक्सलियों के बच्चे 5 से 6 किलोमीटर पैदल पड़ने जाते थे। जिसके बाद बच्चों को देख नक्सलियों को दुःख हुआ कि हमारे स्कूल तोड़ने से बच्चों को बड़ी कठिनाई हो रही है। गांव से दूर पढ़ने जाना पड़ रहा है। जिसके बाद शासन द्वारा चलाए जा रहे लोन वराटू नक्सल उन्मूलन अभियान से प्रभावित होकर नक्सलियों ने थाना भांसी में आकर एसपी एवं कलेक्टर के समक्ष सरेंडर किया। और अपनी बात रखी की जिस स्कूल को हम ने तोड़ा है उसे वह फिर बनाना चाहते है। कलेक्टर ने तुरंत मंजूरी दे दी फिर नक्सलियों ने स्कूल बनाया।

इसी स्कूल को देखने भांसी मासा पारा पहुंची। मासा पारा पहुंचने के लिए धुरली से जंगलों के रास्ते होते हुए कई खेत पगडंडी रास्ते को पार करके मासा पारा पहुंची रास्ता इतना कठिन था कि ग्रामीणों को छोड़ कर कोई आम आदमी यहाँ पहुच नही सकता ।

मासा पारा स्कूल पहुंचने पर बच्चे स्कूल पर पढ़ाई करते हुए दिखे। शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे थे। बच्चों से बात की तो बच्चों ने बताया शिक्षक रोज पढ़ाने आते हैं। और शिक्षको ने बताया गांव तक पहुंचने के लिए रोड नहीं है। ऐसे में उन्हें कड़ी मेहनत कर गांव तक पहुंच कर बच्चों को पढ़ाने आना पड़ता है।

ग्रामीणों ने बताया रोड बन जाने से बच्चों और शिक्षकों को सुविधा हो जाएगी एवं गांव तक एंबुलेंस भी पहुंच सकती है। क्योंकि बीमार होने पर खाट में ढोकर ग्रामीणों को ले जाया जाता है।

मासा पारा स्कूल भवन में पहली से पांचवी तक की क्लास लग रही है।
स्कूल में 27 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। हमारी टीम ने जब बच्चों से बात की तो कोई बच्चा पुलिस कोई एसपी कलेक्टर कोई टीचर कोई शिक्षक तो कोई हेलीकॉप्टर चलाना चाहता है।

अंदरूनी इलाकों में स्कूल खुल जाने से जो बच्चे शिक्षा से वंचित थे । उन्हें शिक्षा मिल रही है और नक्सलगढ़ के बच्चे अब शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे। क्यों कि अब अच्छे अफसर बनने को तैयार हो रहे हैं।

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दंतेवाड़ा से
असीम पाल की रिपोर्ट

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