बारनवापारा के संरक्षित
जंगल में मिला सोने का भंडार
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के बारनवापारा देवपुर संरक्षित वन क्षेत्र में भूगर्भ शास्त्रियों ने सोने के भंडार की मौजूदगी का पता लगाया है। यहां कितना सोना है यह पता लगाने के लिए प्रदेश की एक कंपनी को सर्वे का ठेका दिया गया है। कंपनी को 53 चिन्हित स्थलों पर ड्रिलिंग कर स्वर्ण भंडार की रिपोर्ट देनी है। हालांकि इससे पहले कि कंपनी काम शुरू करती पर्यावरणवादी संगठनों ने इसके विरोध में मोर्चा खोल दिया।
आरटीआइ कार्यकर्ता संजीव अग्रवाल ने संरक्षित वन क्षेत्र में उत्खनन से वन्य जीवों के पर्यावास और पर्यावरण को होने वाले संभावित खतरे को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में याचिका दाखिल की है। एनजीटी ने नौ मई को इस मामले की सुनवाई के दौरान मौके के निरीक्षण के लिए चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था । कमेटी में छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) राकेश चतुर्वेदी, रीजनल आफिस आफ मिनिस्ट्री आफ एनवायरमेंट एंड फारेस्ट के प्रतिनिधि, छत्तीसगढ़ के खनिज विभाग के प्रधान सचिव व बलौदाबाजार जिले के कलेक्टर को नामित किया गया है। 20 जून को कमेटी के सदस्य वन क्षेत्र का निरीक्षण न करने रवाना हुए थे परंतु भारी वर्षा के बीच जंगल के भीतर तक वाहन नहीं जा पाए इसलिए वरिष्ठ अधिकारी मौके तकनिरीक्षण करते हुए अधिकारी। नहीं पहुंच पाए। प्रतिनिधि के तौर पर वहां के डीएफओ, अपर कलेक्टर, खनिज संचालक आठ किमी पैदल चलकर जंगल तक गए थे लेकिन वे भी खनन के लिए चिन्हित सभी 53 स्थल तक नहीं पहुंच पाए। वन क्षेत्र के कक्ष क्रमांक ल 254 में ड्रिलिंग के सात पाइंट देखकर अधिकारी वापस लौट आए। इधर एनजीटी द्वारा नामित अधिकारियों की जगह दूसरों को भेजने पर याचिकाकर्ता ने आपत्ति की है। सुनवाई दो अगस्त को रखी गई है।

